अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। अल्मोड़ा में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां पूरी हो गई है। आज 24 जुलाई को पहले चरण के मतदान हो रहें हैं।
प्रशासन व पुलिस की ओर से व्यवस्थाएं चाक चौबंद

जानकारी के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के चुनाव के लिए आज धौलादेवी, लमगड़ा, चौखुटिया, ताकुला, भैंसियाछाना, ताड़ीखेत ब्लॉक में मतदान होगा। छह ब्लॉकों में 580 ग्राम पंचायतों के लिए 649 पोलिंग बूथ में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें कुल पंजीकृत 2 लाख 83 हजार 789 हजार मतदाता प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। सुबह 08 बजे से मतदान शुरू हो गये है।
बुजुर्ग ने बताई गांव की समस्याएं युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक मतदान के लिए उत्साह दिख रहा है। प्राथमिक विद्यालय बसौली में सुबह से बुजुर्गों के साथ ही युवाओं की भी भीड़ उमड़ रही है। जिसमें एक है खीम सिंह। जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर बसा है विकासखण्ड लमगड़ा का चौमू गांव। यहां के खीम सिंह राणा की उम्र- 95 वर्ष है। जो विकासखण्ड लमगड़ा के चौमू गांव के पोस्ट ऑफिस में अल्मोड़ा हेड ऑफिस से गांव के लिए डाक लाकर गांव में डाक वितरण करते थे। यह पक्की नौकरी में नहीं थे। आज सुबह ही मतदान के लिए मतदान केंद्र पंहुचे। जो गांव के सबसे वरिष्ठ व्यक्ति भी है। जो खेद जताते हुए बताते हैं कि इन लंबे अरसे के बाद भी इस गांव में पक्की सड़क नहीं बन पाई, जो कि अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है। यहां बनी कच्ची सड़क बरसात में खराब हो जाती है। मलबा आने से दिक्कतें बढ़ जाती है। ज्यादा बारिश से सड़क पर वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है। वह बताते हैं कि इतने सालों में इतनी सरकारें आईं, लेकिन विकास के नाम पर यहां आज भी चौमू गांव के लोग दिक्कतों से जूझ रहे है। यहां आने वाले विधायक, सांसद, गांव के जनप्रतिनिधियों से मिले आश्वासन के बाद भी आज भी यहां मूलभूत सुविधाएं तो दूर की बात, पक्की सड़क तक नहीं बन सकी है। बुजुर्ग खीम सिंह ने यह उम्मीद जताई है कि इस बार नयी युवा पीढ़ी जनप्रतिनिधि बनने के बाद यहां की मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि उनके जीवित रहते यहां पक्की सड़क का निर्माण कार्य हो सकेगा, जिससे लोगों को कच्चे व लंबे रास्ते से आवाजाही को मजबूर न होना पड़ेगा। जो पीड़ा उन्होंने व उनके बच्चों व गांव ने देखी है, वह दिक्कते आने वाली भावी पीढ़ी न झेले । अगर गांव में मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं होगा, मुख्य सड़क नहीं होगी तो इससे पलायन भी बढ़ेगा और गांव आबादी की जगह बंजर होने लगेगा।