अल्मोड़ा: गांवों को पालिका में मिलाने की आहट से भड़के ग्रामीण, चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी

अल्मोड़ा:  हवालबाग विकासखंड के 25 ग्राम पंचायतों को नगर पालिका में शामिल करने के प्रस्ताव का पंचायत प्रतिनिधियों समेत ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। खत्याड़ी में विभिन्न ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बैठक की। एक स्वर में पालिका में गांवों को शामिल करने का विरोध किया। जबरन शामिल करने पर जन आंदोलन की चेतावनी दी।

खत्याड़ी में 25 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि और ग्रामीण एकत्र हुए

    न्याय पंचायत खत्याड़ी में 25 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि और ग्रामीण एकत्र हुए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि गांवों को पालिका में शामिल करने का प्रस्ताव बगैर उनकी सहमति के शासन को भेजा गया है। मामले में उनसे कोई भी राय नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि अगर ग्राम पंचायतों को पालिका में मिलाने की कयावद की जाती है, तो उसके विरोध में समस्त ग्राम पंचायतें आंदोलन करने समेत लोक सभा, विभानसभा और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों को पालिका में शामिल नहीं करने की मांग की।

शामिल होने पर पालिका में ये होगी दिक्कतें

ग्रामीणों का कहना है कि पालिका क्षेत्र में शामिल होने पर उन्हें हाउस टैक्स, सीवर टैक्स समेत विभिन्न प्रकार के टैक्स चुकाने पड़ेंगे। गांवों में अधिकांश लोग मध्यम वर्गीय रहते हैं। कई लोगों के पास स्थायी रोजगार भी नहीं है। मेहनत मजदूरी कर वह अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। गांवों में बंदरों, सुअरों का आतंक इतना ज्यादा है जिससे खेती भी प्रभावित हो रही है। कोरोनाकाल में कई लोगों का रोजगार चला गया है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है। अब यदि गांवों को पालिका क्षेत्र में शामिल किया जाता है तो ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

साल 2017 में भी ग्रामीणों ने परिसीमन का किया था विरोध

पूर्व में भी ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। तब भी ग्रामीणों ने एक स्वर में पालिका में शामिल होने का विरोध किया था। ग्रामीणों के विरोध के बाद पालिका में विभिन्न ग्राम पंचायतों को शामिल नहीं किया गया। इधर अब एक बार फिर से गांवों को पालिका में शामिल करने के प्रस्ताव पर ग्रामीण एकजुट हो गये है।

इन ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल करने का भेजा गया है प्रस्ताव

अल्मोड़ा शहर से लगे ग्राम पंचायत खत्याड़ी, सरकार की आली, मालगांव, सरसों, गरगूंठ, भनार, पपरशैली, ठाठ बंगला, गोलनाकरडिया, दामू धारा, चितई पंत आईकर भवन क्षेत्र, सिकुड़ा, शैल गूठ, नैणी कुमस्यार, अथर बाड़ी, तलाड़ बाड़ी, धडसीमी, बल्ढ़ौटी, बरसीमी, नैणी गमस्यार, भैसोड़ा फार्म, बख, फलसीमा, सुनारखोला, रैला तिवारी आदि ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल किये जाने का प्रस्ताव है।

क्या बोले जनप्रतिनिधि:-

पूर्व प्रधान खत्याड़ी

सभी गांव के लोग पालिका विस्तार का विरोध कर रहे हैं। यदि इन गांवों को पालिका में मिलाया गया तो ग्रामीण आंदोलन बाध्य होगें। पहले भी हम पालिका में शामिल होने का विरोध कर चुके है।
हरीश कनवाल, पूर्व प्रधान खत्याड़ी।

पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख हवालबाग

ग्रामीणों को विश्वास में लिए बगैर नगर पालिका क्षेत्र का विस्तार करने के लिए शहर के आसपास की ग्राम पंचायतों को पालिका में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जो जनभावनाओं के खिलाफ है।
आनंद कनवाल, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख हवालबाग।

प्रधान तलाड़बाड़ी

जनभावनाओं से खिलवाड़ कर जबरन ग्रामीण क्षेत्रों को पालिका में शामिल करने का प्रयास कर रही है। यदि इस फैसले को वापस नहीं लिया तो ग्रामीणों को एकजुट होकर आंदोलन करेंगे।
किशन बिष्ट, प्रधान तलाड़बाड़ी।

प्रधान गोलनाकरड़िया

इस जनविरोधी फैसले को ग्रामीण किसी भी कीमत में स्वीकार नहीं करेंगे। जबरन पालिका में शामिल किया गया तो, समस्त ग्रामीण उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
हंसा मर्तोलिया, प्रधान गोलनाकरड़िया।

प्रधान बख

ग्राम सभाओं में 80 प्रतिशत लोग बेरोजगार हैं। अधिकांश लोगों के पास पुराने मकान है। लोग मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं, ऐसे में पालिका में शामिल होकर ग्रामीणों आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
देवेंद्र बिष्ट, प्रधान बख।

पूर्व प्रधान सरसों

पालिका में शामिल होने का हम पुरजोर विरोध करते है। पालिका में शामिल होने पर ग्रामीणों को कई कर देने होगें। जिससे खासकर मध्यम वर्ग के लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
नवीन बिष्ट, पूर्व प्रधान सरसों।

ये रहे मौजूद

हवालबाग ब्लॉक के प्रधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष हरीश कनवाल, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख आनंद सिंह कनवाल, प्रधान खत्याड़ी राधा देवी, प्रधान पिंकी बिष्ट, नवीन बिष्ट, हर्ष कनवाल, मनोज आर्या, भूपेंद्र कनवाल, बसंत कनवाल, उमेद कनवाल, नवीन सिंह, राजेंद्र सिंह, भोला सिंह, विरेंद्र कनवाल, नरेंद्र मेहता, कुंदन जीना, धीरेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, कुंदन कनवाल, हंसा मर्तोलिया, देवेंद्र बिष्ट, किशन बिष्ट, गोपाल सिंह, प्रताप सिंह कनवाल, राजेंद्र सिंह खोलिया, भुवन बिष्ट, ममता रावत, मुकेश कुमार, हेम भंडारी, जसवंत सिंह, प्रभात पवार, नारायण सिंह, नवीन कनवाल, नंदन राम, सुंदर सिंह कनवाल, गोपाल सिंह कनवाल समेत कई जनप्रतिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।