अल्मोड़ा: आजीविका आधारित उद्यमों के प्रोत्साहन हेतु कार्यशाला का आयोजन, वैज्ञानिक विधि से शहद उत्पादन पर दिया जोर

अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। जनपद अल्मोड़ा में कृषकों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों के संवर्धन तथा वैज्ञानिक विधि से मौन पालन जैसे आजीविका आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन एवं सुदृढ़ीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन न्याय पंचायत कुवाली के पंचायत घर में किया गया।

कार्यशाला का आयोजन

यह बैठक सामाजिक विकास एवं प्रबंध समिति (SVEPS), अल्मोड़ा के तत्वावधान में 27 जनवरी 2026 को प्रातः 11:30 बजे से पंचायत घर कुवाली, विकास खंड द्वाराहाट, अल्मोड़ा पर आयोजित की गई। जिसमें मुख्य वक्ता जिला विकास प्रपंधक, नाबार्ड, अल्मोड़ा तथा सेवा निर्वृत वरिष्ठ कीट विद् डॉ पी एस कनवाल उपस्थित रहे। संस्था के मुख्य कार्यकारी शंभू दत्त जोशी ने सभी उपस्थित अधिकारी, कृषकों, मौनपालकों का स्वागत किया और कार्यशाला आयोजित किये जाने का उद्देश्य बताया, इसके अतिरिक्त बताया गया कि अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न विकासखंडों—हवालबाग, लमगड़ा, धौलादेवी, भैसियाछाना, ताकुला एवं द्वाराहाट—में किसान उत्पादक संगठन के प्रभावी गठन, संचालन और दीर्घकालिक स्थायित्व तथा सहकारिता सदस्य बनने के लिए यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक का मुख्य उद्देश्य एफपीओ की संरचना, प्रबंधन ढांचे, सदस्य कृषकों की भूमिका तथा विभागीय समन्वय के माध्यम से एफपीओ को आत्मनिर्भर बनाना तथा 750 सदस्य बनाना है।

रहें मौजूद

बैठक में कृषि, उद्यान, पशुपालन, पर्यावरण, सहकारिता, उद्योग सहित अन्य संबंधित विभागों की भूमिका एवं सहयोग पर विस्तार से चर्चा की की गयी। विशेष रूप से वैज्ञानिक विधि से मौन पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने, स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित शहद एवं अन्य कृषि उत्पादों के विपणन, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे किसानों की आय में ठोस वृद्धि हो सके। बैठक में उपस्थित सस्था विशेषज्ञ डॉ पी एस कनवाल, शंभू दत्त, रमेश मेहता, ललित पांडे, भीम सिंह बगड़वाल एवं उद्यान विभाग के सहायक विकास अधिकारी रेनु अधिकारी तथा सहकारी समिति कुवाली के सचिव नेहा जोशी ने किसानों की आय वृद्धि, संगठनात्मक मजबूती तथा बाजार से जुड़ाव को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। बैठक में  एफपीओ प्रतिनिधि, ग्राम-भितारकोट, मझोली, कफलना के कृषक एवं मौन पालक मौजूद रहे।

दी यह जानकारी

बैठक में जिला विकास प्रबंधक गिरीश चंद्र पंत द्वारा एफ पी ओ की संरचना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी एफपीओ की सफलता उसकी मजबूत प्रबंधन प्रणाली, पारदर्शी लेखा-जोखा और सक्रिय सदस्य सहभागिता पर निर्भर करती है। उन्होंने सुझाव दिया कि एफपीओ के निदेशक मंडल को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे वे वित्तीय प्रबंधन, विपणन और सरकारी योजनाओं का बेहतर लाभ उठा सकें। नाबार्ड के जिला विकास प्रबन्धक गिरीश चंद्र पंत ने एफपीओ के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता, ऋण सुविधा और अनुदान योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म वित्त, कार्यशील पूंजी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए नाबार्ड द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका सही ढंग से उपयोग कर एफपीओ अपने सदस्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकते हैं।

मौन पालन आय पर कहीं यह बात

मौन पालकों ने वैज्ञानिक विधि से शहद उत्पादन पर जोर देते हुए कहा कि कुवाली क्षेत्र जिला अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में मौन पालन आय का एक स्थायी और लाभकारी स्रोत बन सकता है। उन्होंने आधुनिक बॉक्स, रोग प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन और ब्रांडिंग पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना था कि यदि एफपीओ के माध्यम से शहद का सामूहिक संग्रह, प्रोसेसिंग और विपणन किया जाए, तो किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। उद्यान विभाग के सहायक विकास अधिकारी (उद्यान) द्वारा FPO को उद्यान विभाग का सहयोग देने की बात कही और कृषि- उद्यान संबंधी स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन विपणन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कच्चे उत्पाद बेचने के बजाय प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और स्थानीय ब्रांड विकसित कर एफपीओ बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं। इसके साथ ही ई-मार्केटिंग, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सरकारी ई-नाम जैसी योजनाओं से जुड़ने की सलाह दी गई।

दिए यह सुझाव

सहकारिता विभाग के प्राथमिक कृषि ऋण समिति की सचिव, कुवाली ने कहा कि एफपीओ को केवल एक संस्था न मानकर एक व्यवसायिक इकाई के रूप में विकसित करना होगा। इसके लिए दीर्घकालिक बिजनेस प्लान, जोखिम प्रबंधन और विभागीय समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर एफपीओ को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त एफपीओ के सदस्य कृषकों के दायित्व, सक्रिय सहभागिता, प्रभावी संचालन हेतु प्रबंधन तंत्र, आय सृजन की संभावनाएं तथा भविष्य की कार्ययोजना एवं रोडमैप पर भी मंथन किया गया। बैठक में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों एवं विशेषज्ञों द्वारा एफपीओ के सफल संचालन के लिए महत्त्वपूर्ण सुझाव साझा किये।

बताए यह मजबूत प्रयास

सामाजिक विकास एवं प्रबंध समिति के मुख्य कार्यकारी शंभू दत्त जोशी ने कहा कि प्रस्तावित एफपीओ को नाबार्ड के सहयोग से सशक्त बनाने की दिशा में यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम है। संस्था ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों, कृषकों, मौनपालकों एवं हितधारकों का बैठक मई शामिल होने पर आभार व्यक्त किया। उन्होने आगे कहा कि एफ़पीओ के संचालन के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत प्रयास किए जाएंगे, भविष्य में किसानों को संगठित कर उन्हें बेहतर बाजार, तकनीकी मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा, जिससे कि सतत कृषि विकास और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण को नई गति मिलने की उम्मीद रहेगी।