नये साल की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही अब नये साल पर एक और नई जेनरेशन हमारे बीच आई है।
नया नाम ‘Generation Beta’
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आपने अभी तक जेनरेशन अल्फा और जेन Z के बारे में सुना है। अब नया नाम ‘Generation Beta’ होगा। अब एक जनवरी 2025 से जन्मे बच्चों को ‘जेनरेशन बीटा’ नाम दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा इसलिए क्योंकि जनरेशन बीटा ऐसी पीढ़ी होगी जिनकी जिंदगी पूरी तरह तकनीक से लैस होगा। पढ़ाई से लेकर हेल्थकेयर और एंटरटेनमेंट तक एआइ और ऑटोमेशन का दबदबा होगा। साथ ही जनरेशन बीटा के बच्चों के जीवन में माता-पिता की भूमिका अहम हो जाएगी। माता-पिता को अपने बच्चों को डिजिटल पहचान को सुरक्षित और समझदारी से बनाने के लिए मार्गदर्शन देना होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोशल रिसर्चर मार्क मैक्रिंडल ने बताया कि ये जनरेशन 2035 तक ग्लोबल पॉपुलेशन का 16 प्रतिशत हिस्सा बन सकती है, जिनमें से कई 22वीं सदी की शुरुआत देख सकते हैं।
टेक्निकली काफी स्ट्रांग तो शारीरिक हो सकते हैं कमजोर
इन बच्चों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जैसे धरती का बढ़ता तापमान, शहरों का अत्यधिक विस्तार और जनसंख्या वृद्धि आदि। जिससे निपटने के लिए उन्हें अपने स्वभाव में होशियार, मिलनसार और बदलते हालात के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता विकसित करनी होगी।
जेनरेशन बीटा
2025-2039: अब 1 जनवरी 2025 से 2039 के बीच पैदा होने वाली पीढ़ी को जनरेशन बीटा कहा जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में इस पीढ़ी का पहला बच्चा 1 जनवरी को मिजोरम के आइजोल शहर में पैदा हुआ है। बच्चें का जन्म 1 जनवरी को सुबह 12:03 बजे आइजोल के डर्टलैंग स्थित सिनॉड अस्पताल में हुआ। और यह ‘जनरेशन बीटा’ का पहला बच्चा है।