आज 13 अप्रैल 2026 है। आज वल्लभाचार्य जयंती है। वल्लभाचार्य जयंती पुष्टिमार्ग के संस्थापक और महान वैष्णव संत श्री वल्लभाचार्य का जन्मदिवस है, जो प्रतिवर्ष वैशाख कृष्ण एकादशी (वरुथिनी एकादशी) को मनाई जाती है।
श्री वल्लभाचार्य की 547वीं जन्म वर्षगांठ
श्रीकृष्ण के अनेक भक्तों में से एक है संत शिरोमणि वल्लभाचार्य। 1479 ईस्वी में जन्मे, महाप्रभु वल्लभाचार्य ने ‘शुद्धाद्वैत’ दर्शन और कृष्ण भक्ति का प्रसार किया। यह पर्व विशेषकर ब्रज, गुजरात और महाराष्ट्र में भक्तिभाव से मनाया जाता है। इस साल श्री वल्लभाचार्य की 547वीं जन्म वर्षगांठ है। उन्होंने हिंदू धर्म में पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति पर आधारित है। पुष्टि मार्ग को वल्लभ सम्प्रदाय के नाम से भी जाना जाता है। खासतौर पर श्रीनाथ जी की पूजा करने वालों के लिए ये दिन बहुत खास है। वल्लभाचार्य को वेदों और उपनिषदों का अच्छा ज्ञान था। उन्हें वल्लभ तथा महाप्रभु वल्लभाचार्य की उपाधि दी गई थी। वल्लभाचार्य ने शुद्ध अद्वैत या शुद्ध अद्वैतवाद का दर्शन प्रतिपादित किया। उन्होंने भारत के ब्रज क्षेत्र में कृष्ण-केंद्रित पंथ, वैष्णववाद के पुष्टि संप्रदाय की भी स्थापना की। वल्लभाचार्य का जन्म 1479 ई. में में वाराणसी में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वल्लभाचार्य ‘पुष्टिमार्ग’ नामक भक्ति संप्रदाय के संस्थापक थे। पुष्टिमार्ग रुद्र संप्रदाय की एक उपपरंपरा है, जिसे पुष्टिमार्ग संप्रदाय या वल्लभ संप्रदाय (वैष्णववाद) के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में इसकी स्थापना की थी और यह कृष्ण को समर्पित है।
होते हैं विभिन्न आयोजन
श्री वल्लभ आचार्य के जन्मदिन पर मुख्य रूप से श्रीकृष्ण की पूजा -आराधना की जाती है. क्योंकि वल्लभ आचार्य जी भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे।श्रीकृष्ण के भक्त इस दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण, विशेष रूप से श्रीनाथजी की पूजा करते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं।