02 अप्रैल: पवित्र स्नान और दान का महासंयोग: चैत्र पूर्णिमा पर बरसेगी लक्ष्मी-नारायण व हनुमान जी की विशेष कृपा

आज 02 अप्रैल 2026 है। आज चैत्र पूर्णिमा है। चैत्र मास में आने वाली पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।  पूर्णिमा तिथि का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मानसिक शांति और सुख समृद्धि मिलती है। इस दिन स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख-समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है। हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा है, जो भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और हनुमान जी को समर्पित अत्यंत पवित्र दिन है। इस दिन स्नान, दान और व्रत करने से सुख-समृद्धि, सुखद वैवाहिक जीवन और पापों से मुक्ति मिलती है। यह चित्तिराई पूर्णिमा के रूप में भी प्रसिद्ध है, जो आत्मा को शुद्ध करने वाला माना जाता है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को पवनपुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। इसी के कारण इस दिन को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। 

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को सुबह में 7 बजकर 7 मिनट पर आरंभ हो रही है, जो 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में 02 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा पड़ रही है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को सुबह 07:06 बजे से होगा। पूर्णिमा तिथि समाप्त गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को सुबह 07:41 बजे को होगी। इस दिन चंद्रोदय शाम 07 बजकर 02 मिनट पर होगा। चैत्र पूर्णिमा को श्री विष्णु को समर्पित व्रत रखा जाता है। व्रत वाले दिन शाम को चंद्रोदय को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

जानें पूजन विधि

आज सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प ले। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं अब भगवान विष्णु और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अभिषेक करके उन्हें वस्त्र और फूल अर्पित करें। अब पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके भगवान को भोग लगाएं और शाम में चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करें।