उच्चतम न्यायालय ने राजनेता अतीक अहमद की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत के दौरान सुरक्षा की मांग की गई थी। शीर्ष न्यायालय ने अतीक अहमद केे जीवन को खतरे की बात मानने से इंकार करते हुए कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।उमेश पाल अपहरण केस में अतीक अहमद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। 17 साल पहले अतीक ने राजू पाल हत्याकांड मामले में गवाही बदलने के लिए उमेश पाल का अपहरण किया था।
अतीक के भाई अशरफ समेत 7 को किया गया बरी
कोर्ट ने इस मामले में अतीक के अलावा हनीफ, दिनेश पासी को भी दोषी पाया और इन तीनों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, इस मामले में अतीक के भाई अशरफ समेत 7 को बरी कर दिया गया है। अदालत में पेश किए गए आरोप पत्र में 11 आरोपियों का जिक्र किया गया था। फूलपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व सांसद अतीक अहमद को जून 2019 में गुजरात की साबरमती केंद्रीय जेल में भेज दिया गया क्योंकि उत्तर प्रदेश में जेल में रहने के दौरान उस पर आरोप लगा कि उसने जेल में रहते हुए रियल एस्टेट व्यवसायी मोहित जायसवाल के अपहरण और मारपीट जैसे मामलों को अंजाम दिया। अतीक अहमद पर उमेश पाल हत्याकांड सहित कुल 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
ये था पूरा मामला
प्रयागराज में 2005 में बहुजन समाज पार्टी के विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य गवाह उमेश पाल और उसके दो सुरक्षा कर्मियों की दिनदहाड़े गोली मारकर 24 फरवरी को हत्या कर दी गई थी।बसपा विधायक राजू पाल के करीबी रहे उमेश पाल का अपहरण राजूपाल की हत्या में मनमाफिक गवाही दिलवाने के लिए किया गया था। उमेश इस हत्याकांड के चश्मदीद थे और अतीक के खिलाफ गवाह के रूप में उनका नाम दर्ज था। धमकी के बावजूद वह गवाही से पलटने को तैयार नहीं थे इसलिए 28 फरवरी को उनका दिनदहाड़े पिस्टल सटाकर लैंड क्रूजर गाड़ी से अपहरण किया गया और फिर उन्हें जमकर टॉर्चर भी किया गया।उमेश ने पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में बताया था कि 28 फरवरी 2006 को अतीक अहमद की लैंड क्रूजर कार समेत एक अन्य वाहन ने उसका रास्ता रोका और घेर लिया। उस कार से दिनेश पासी, अंसार बाबा और एक अन्य शख्स उतरा। उन्होंने उस पर पिस्तौल तान दी और कार में खींच लिया। इस कार के अंदर अतीक अहमद और तीन अन्य लोग राइफल लेकर बैठे थे। इन लोगों ने उससे मारपीट की और चकिया स्थित अपने दफ्तर लेकर पहुंचे। उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया और मारपीट की गई। करंट के झटके भी लगाए गए।उमेश ने पुलिस को बताया था कि आरोपितों ने उन्हें धमकी दी थी कि राजू पाल हत्याकांड में बयान बदल लो, वरना परिवार समेत जान से मार दिए जाओगे। अतीक ने अपने वकील खान हनीफ से लेकर एक पर्चा मुझे दिया और कहा कि इसको पढ़कर रट लो। कल अदालत में यही बयान देना है। वरना तुम्हारी बोटी-बोटी काटकर कुत्तों को खिला दूंगा।उमेश ने बताया था कि रात में अतीक ने अपने आदमियों को भेजकर उनके घर वालों को भी धमकी दिलवाई और कहा कि अगर तुम लोग थाना, पुलिस करोगे तो उमेश की हत्या कर दी जाएगी। उन्हें रात भर कमरे में बंद कर प्रताड़ित किया गया। सुबह करीब 10:00 बजे अतीक व उसके साथी उन्हें गाड़ी में बैठाकर कोर्ट ले गए और कहा कि रात में जो पर्चा लिखा था वही बयान देना नहीं तो लौट कर घर नहीं आओगे। अतीक के आतंक के कारण उमेश ने अदालत में अपना बयान भी बदल दिया। उमेश ने यह भी कहा था कि उन्होंने अतीक के दबाव में गलत बयान दिया है इसलिए उनके उस बयान को असत्य समझा जाए और उनकी उनके परिवार की सुरक्षा की जाए।उमेश पाल का अपहरण 28 फरवरी 2006 को हुआ था। हालांकि पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। इसके बाद उमेश पाल ने 3 जुलाई 2007 को सीएम को पूरे मामले से अवगत करवाते हुए पत्र भेजा। पत्र को लेकर जब जवाब मांगा गया तब पुलिस सक्रिय हुई और 5 जुलाई 2007 को एसपी सिटी के आदेश पर धूमनगंज थाने में एफ आई आर दर्ज की गई।