आज 19 अगस्त 2025 है। आज विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है। यह दिन फोटोग्राफी की कला, विज्ञान और इतिहास का जश्न मनाने और दुनिया भर के फोटोग्राफरों को एक साथ लाने का एक अवसर है।
जानें कब हुई शुरूआत
19वीं शताब्दी में, 1837 में, दो फ्रांसीसी वैज्ञानिकों, जोसेफ नाइसफोर नीप्स और लुई डागुएरे ने पहली फोटोग्राफिक प्रक्रिया, जिसे डागुएरोटाइप कहा जाता है, विकसित की। 19 जनवरी, 1839 को, फ्रांसीसी विज्ञान अकादमी ने इस आविष्कार की घोषणा की। इसकी शुरुआत फ्रांस में 9 जनवरी, 1839 से शुरू हुई थी। इस प्रक्रिया का आविष्कार फ्रांस के जोसेफ नाइसफोर और लुइस डॉगेर ने किया था। 19 अगस्त, 1839 को फ्रांस की सरकार ने इस आविष्कार की घोषणा की थी और इसका पेटेंट प्राप्त किया था। इसी दिन की याद में ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ यानी ‘विश्व फोटोग्राफी दिवस’ मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’
दरअसल यह दिन उन्हें समर्पित है, जिन्होंने अपने खास पलों को तस्वीरों में कैद कर उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया। जी हां, हम बात कर रहे हैं उन फोटोग्राफर की जिन्होंने इसे अपने कला को संजोने का काम किया। आज के समय में दुनियाभर के फोटोग्राफरों को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल ‘वर्ल्ड फोटोग्राफी डे’ मनाया जाता है। एक समय था जब लोगों के पास कैमरा तक नहीं होता था। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में लोग फोटो खिंचाने के लिए कई कोस दूर फोटो स्टूडियो में फोटो खिंचवाने जाते थे। लेकिन आज हर लगभग हर इंसान के पास या तो कैमरा है या कैमरे वाला मोबाइल, जिससे लोग आराम से कहीं भी कभी भी तस्वीरें खींच सकते हैं और उन्हें सहेज कर रख सकते हैं।
‘फोटोग्राफी डे’ का महत्व
विश्व फोटोग्राफी दिवस का महत्व जागरूकता पैदा करना, विचारों को साझा करना और फोटोग्राफी के क्षेत्र में लोगों को आने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह दिन न केवल उस व्यक्ति को याद करता है जिसने इस क्षेत्र में योगदान दिया है बल्कि यह भविष्य की पीढ़ी को भी अपना कौशल दिखाने के लिए प्रेरित करता है।
1839 में पहली बार खींची गई थी सेल्फी
सन् 1839 की शुरुआत में अमेरिकी के रहने वाले रॉबर्ट कॉर्नेलियस द्वारा एक सेल्फी क्लिक की गई थी। हालांकि उस समय उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि ऐसा फोटा क्लिक भविष्य में सेल्फी के रूप में जाना जाएगा। कॉर्नेलियस ने तो बस अपना कैमरा सेट किया था और लेंस कैप को हिलाते हुए यह तस्वीर ली थी। उस तस्वीर के पीछे उन्होंने लिखा था “1839 में ली गई फ्रस्ट लाइट पिक्चर”।
1861 में खींची गई थी पहली क्लरफुल तस्वीर
सन् 1861 में थॉमस सल्टन ने पहली ड्यूरेबल रंगीन तस्वीर खींची। यह तीन ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों का सेट था जिसे लाल, हरे और नीले फिल्टर के मदद से खींचा गया था। हालांकि, उस समय इस्तेमाल होने वाले फोटोग्राफिक इमल्शन उतना बेहतर रिजल्ट नहीं देते थे, इसलिए परिणाम बहुत ही संतोषजनक नहीं होता था और लोग इन तस्वीरों को जल्द ही भूला देते थे।