बैडमिंटन स्टार लक्ष्य को आयु धोखाधड़ी विवाद मामले में मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। बीते साल 2022 में बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन, उनके परिवार और पूर्व राष्ट्रीय कोच विमल कुमार पर उम्र संबंधी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कराया गया‌ था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन के एक मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है। जिसमें खिलाड़ी जन्मतिथि (उम्र) को लेकर धोखाधड़ी के आरोपों की जांच की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट को नोटिस भी जारी किया है। साथ ही पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के साथ ही मामले की सुनवाई 16 अप्रेल तक स्थगित कर दी है।

2022 का मामला

रिपोर्ट्स के मुताबिक ये मामला 2022 का है। जब लक्ष्य, उनके पिता, उनके परिवार और कोच विमल कुमार पर बर्थ सर्टिफिकेट से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे थे। जिसमें शिकायत में नागराजा का कहना था कि 2010 में लक्ष्य के कोच और उनके माता-पिता ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनवाया था। इस कारण लक्ष्य उम्र ज्यादा होने के बावजूद अलग-अलग एज ग्रुप में खेल पाए। बर्थ सर्टिफिकेट के मुताबिक लक्ष्य सेन का जन्म 2001 में हुआ जबकि नागराजा का कहना था कि वह 1998 में पैदा हुए है। वहीं सेन के परिवार के मुताबित, ये लक्ष्य की छवि को धूमिल करने की प्रयास है। वहीं लक्ष्य सेन और उनके परिवार ने कर्नाटक हाई कोर्ट अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ पुर्नविचार याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। मंगलवार को शीर्ष अदालत कर्नाटक उच्च न्यायालय के 19 फरवरी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।जिसके बाद बैडमिंटन स्टार व अर्जुन अवॉर्डी लक्ष्य सेन और उनके भाई चिराग सेन ने जन्मतिथि विवाद में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।