बागेश्वर: कत्यूरी राजवंश की अनूठी ऐतिहासिक धरोहर बैजनाथ मंदिर, शिव-पार्वती की होती है एक साथ पूजा, 1150 ईस्वी का है ऐतिहासिक इतिहास

बागेश्वर: बागेश्वर जिले में गोमती नदी के शांत और सुरम्य तट पर ऐतिहासिक बैजनाथ मंदिर स्थित है। जो‌ अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।

सीएम ने साझा की वीडियो

सावन के पवित्र महीने के दूसरे सोमवार के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस पावन धाम का एक वीडियो शेयर किया। जिसमें उन्होंने लिखा, “बागेश्वर जनपद की पावन धरती पर स्थित श्री बैजनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित दिव्यता, आस्था और आध्यात्मिक विरासत का अद्भुत संगम है। कत्यूरी शासकों की अद्वितीय स्थापत्य कला से निर्मित यह प्राचीन धाम अपनी भव्य शिल्पकला के लिए विशेष पहचान रखता है। आइए, सावन के इस पवित्र महीने में बैजनाथ धाम के दर्शन कर देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करें।”

इतने साल पुराना है इतिहास

ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण 1150 ईस्वी के आसपास कत्यूरी राजाओं द्वारा कराया गया था, जब इस क्षेत्र का नाम ‘कार्तिकेयपुर’ था और यह उनकी राजधानी हुआ करती थी। यहाँ भगवान शिव ‘वैद्यनाथ’ के रूप में पूजे जाते हैं। यह खूबसूरत स्थल नागर शैली की वास्तुकला और प्राचीन मूर्तियों के लिए विशेष ख्याति प्राप्त है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह गोमती और गरुड़ गंगा के संगम के पास संपन्न हुआ था। महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति (उत्तरायणी) के पर्व पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है। यह पूरा परिसर 18 पत्थरों से बने मंदिरों का एक समूह है, जिसमें मुख्य मंदिर भगवान शिव का है। इस मुख्य मंदिर में माता पार्वती की काले पत्थर पर उकेरी गई बेहद सुंदर और अनूठी मूर्ति स्थापित है।