आज 11 सितंबर 2026 है। आज भाद्रपद अमावस्या है। भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी और कुशग्रहणी अमावस्या भी कहते हैं। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जब अमावस्या तिथि शाम के समय (प्रदोष काल) में होती है, तो वह दिन व्रत और पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। 2026 में यह स्थिति 10 सितंबर, गुरुवार को बन रही है। इसलिए, पिठोरी अमावस्या का व्रत और शाम की पूजा 10 सितंबर को ही की जाएगी। इस दिन नदी स्नान, पितरों के तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026 को शुरू होगी और इसका समापन 11 सितंबर को होगा। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जब अमावस्या तिथि शाम के समय (प्रदोष काल) में होती है, तो वह दिन व्रत और पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। 2026 में यह स्थिति 10 सितंबर, गुरुवार को बन रही है। इसलिए, पिठोरी अमावस्या का व्रत और शाम की पूजा 10 सितंबर को ही की जाएगी।11 सितंबर, शुक्रवार को सूर्योदय के समय अमावस्या मौजूद रहेगी, इसलिए सुबह स्नान-दान और पितरों के निमित्त भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को मानी जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना जाता है। ऐसे में शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और पेड़ की परिक्रमा लगाएं। इस उपाय को करने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है और आर्थिक तंगी दूर होती है। धन में वृद्धि होती है।
जानें पूजन विधि
सुबह जल्दी नहाकर व्रत का संकल्प लें। दिन भर व्रत रखें और मुख्य पूजा शाम को प्रदोष काल में करें। पूजा में हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल और धूप-दीप का इस्तेमाल जरूर करें। प्रसाद के रूप में खीर, पूरी, गुड़ और आटे से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित करें। अंत में पिठोरी व्रत की कथा जरूर सुनें।