देश में जहां कहीं भी कानून और व्यवस्था की समस्या होती है, चुनाव या अन्य किसी भी प्रकार की ड्यूटी में जब भी सुरक्षाबलों की आवश्यकता होती है, तो राज्य सबसे पहले सीआरपीएफ की ही मांग करते हैं। केन्द्र सरकार ने भी चुनाव के लिए सीआरपीएफ को ही नोडल एजेंसी नियुक्त किया है । जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों आतंकवादियों को मार गिराने और फिदायीन हमलों को नाकाम करने में इस बल ने बड़ी कामयाबी हासिल की है।
जानें इसके बारे में
केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सी॰आर॰पी॰एफ॰) भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सबसे बड़ा है। यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करता है। सीआरपीएफ की प्राथमिक भूमिका पुलिस कार्रवाई में राज्य / संघ शासित प्रदेशों की सहायता, कानून-व्यवस्था और आतंकवाद विरोध में निहित है। यह क्राउन प्रतिनिधि पुलिस के रूप में 27 जुलाई 1939 को अस्तित्व में आया। भारतीय स्वतंत्रता के बाद यह 28 दिसंबर 1949 को सीआरपीएफ अधिनियम के लागू होने पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल बन गया।
भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सबसे बड़ा है सीआरपीएफ
सीआरपीएफ ने ड्यूटी के प्रति अपने समर्पण, सच्ची निष्ठा से भारत सरकार, राज्य सरकारों तथा देश की जनता का विश्वास व प्यार जीता है। गुजरात का रण ऑफ कच्छ हो या फिर लद्दाख का हॉट स्प्रिंग, सीआरपीएफ के जवानों की वीरता की अद्भुत मिसाल है। सीआरपीएफ एक ऐसा बल है जिसके पास अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करने के लिए अपनी स्पेशलाइज्ड विंग हैं। सांप्रदायिक व जातीय हिंसा रोकने, बाढ़ एवं आगजनी के दौरान राहत कार्य से निपटने में ‘आरएएफ’ सक्षम है तो वहीं नक्सलवाद व माओवाद से निपटने के लिए ‘कोबरा’ बटालियन और संसद की सुरक्षा में ‘पीडीजी’ बटालियन। बता दें कि 19 मार्च को सरदार पटेल ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को ध्वज (कलर) प्रदान किया था इसलिए इस तिथि को स्थापना दिवस के लिए ज्यादा अनुकूल मानकर गृह विभाग ने स्वीकृति दे दी है। इससे पहले ब्रिटिश काल में 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में नीमच में स्थापना हुई थी। इसलिए 27 जुलाई को सीआरपीएफ का स्थापना दिवस मनाया जाता था। लेकिन 2018 से इसे 19 मार्च को मनाया जाता है।