13 दिसंबर 2001: संसद में हुआ था आतंकी हमला, दिल्ली पुलिस के 6 जवान और संसद के 2 सुरक्षाकर्मी व‌ एक माली हुए थे‌ शहीद, 05 आतंकवादी भी ढेर

आज 13 दिसंबर 2025 है। आज ही के दिन संसद में आतंकी हमला हुआ था। यह दिन 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकवादी हमले की याद दिलाता है, जिसे भारतीय इतिहास में एक दुखद घटना माना जाता है।

जानें क्या हुआ था 13 दिसंबर 2001 को

तारीख थी 13 दिसंबर 2001। जब संसद में विंटर सेशन चल रहा था और “महिला आरक्षण बिल” पर हंगामा जारी था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लेकिन 11:02 बजे संसद को स्थगित कर दिया गया। इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी संसद से जा चुके थे। तब के उपराष्ट्रपति कृष्णकांत का काफिला भी निकलने ही वाला था। संसद स्थगित होने के बाद गेट नंबर 12 पर सफेद गाड़ियों का तांता लग गया। करीब साढ़े ग्यारह बजे उपराष्ट्रपति के सिक्योरिटी गार्ड उनके बाहर आने का इंतजार कर रहे थे और तभी सफेद एंबेसडर में सवार 5 आतंकी गेट नंबर-12 से संसद के अंदर घुस गये। तभी आतंकियों की कार उपराष्ट्रपति की कार से टकरा गई। आतंकियों के पास एके-47 और हैंडग्रेनेड थे, जबकि सिक्योरिटी गार्ड निहत्थे थे। गोलियों की आवाज सुनकर ये बटालियन अलर्ट हो गई। CRPF के जवान दौड़-भागकर आए। उस वक्त सदन में देश के गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी, प्रमोद महाजन समेत कई बड़े नेता और पत्रकार मौजूद थे। जवानों और आतंकियों के बीच 11:30 बजे शुरू हुई ये मुठभेड़ शाम को 4 बजे खत्म हुई। 13 दिसंबर 2001 को नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद भवन पर हुआ एक आतंकवादी हमला था। यह हमला जैश-ए-मोहम्मद के पाँच आतंकवादियों द्वारा किया गया था, जिसमें दिल्ली पुलिस के छह जवान, संसद सुरक्षा सेवा के दो जवान और एक माली शहीद हो गए थे। सुरक्षा बलों ने सभी पाँच आतंकवादियों को मार गिराया था। पांचों आतंकी तो मर गए, लेकिन संसद हमले की साजिश रचने वाले बच गए थे। संसद हमले के दो दिन बाद ही 15 दिसंबर 2001 को अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी और अफशान को बरी कर दिया, लेकिन अफजल गुरु की मौत की सजा को बरकरार रखा। शौकत हुसैन की मौत की सजा को भी घटा दिया और 10 साल की सजा का फैसला सुनाया। 9 फरवरी 2013 को अफजल गुरू को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुबह 8 बजे फांसी पर लटका दिया गया।

2001 में लोकतंत्र के मंदिर पर हुआ हमला

13 दिसंबर 2001 को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया था। आतंकियों की योजना लोकतंत्र के मंदिर को विस्फोटकों से उड़ाने की थी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों के साहस और वीरता के आगे वे अपने नापाक इरादे में नाकाम रहे और सुरक्षाबलों ने आधे घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद सभी 5 आतंकी मार गिराए गए। इस हमले में दिल्ली पुलिस के 6 जवान और संसद के 2 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। एक माली की भी मौत हुई थी।