हर वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि पर दिवाली का त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है। दीवाली महापर्व में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती, कुबेर और काली मां की पूजा होती है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी माता धरती पर आती है । और सभी घर में जाती हैं ।और साफ़ सुथरे और प्रकाशवान घर में माता निवास करने लगती है । कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं।
जाने क्यों की जाती है लक्ष्मी की पूजा
दिवाली को लक्ष्मी पूजा का कारण समुद्र मंथन है, दरअसल, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था तो इसमें से लक्ष्मी भी निकली थी। ये मान्यता है कि जिस दिन लक्ष्मी निकली थी, उस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या थी । माता लक्ष्मी का समुद्र मंथन से आगमन हो रहा था, सभी देवता हाथ जोड़कर आराधना कर रहे थे । इस वजह से दिवाली को लक्ष्मी की पूजा की जाती है । और कई जानकार कहते हैं कि भारतीय कालगणना के अनुसार 14 मनुओं का समय बीतने और प्रलय होने के पश्चात् पुनर्निर्माण व नई सृष्टि का आरंभ दीपावली के दिन ही हुआ था । इस वजह से लक्ष्मी की पूजा की जाती है । जबकि कई लोग ये कहते हैं कि कार्तिक मास की पहली अमावस्या ही नई शुरुआत और नव निर्माण का समय होता है । यह भी कहा जाता है दीवाली के दिन दिवाली के दिन कई राक्षसों का अंत हुआ था, जिसमें नार्कासुर, बली आदि शामिल है । इसलिए दिवाली को अच्छा संकेत माना जाता है और समृद्धि के देवी यानी लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है ।
दीपावली पर्व
अमावस्या तिथि के दिन दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस बार अमावस्या तिथि का आरंभ 12 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 43 मिनट से हो रहा है और अगले दिन 13 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के विशेष महत्व है।
जानिये शुभ मुहर्त और पूजन विधि
12 ननवंबर को प्रदोष काल पूजन मुहूर्त : शाम में 5 बजकर 29 मिनट से 8 बजकर 8 मिनट तक।
12 ननवंबर वृषभ लग्न : शाम में 6 बजकर 9 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक।
दीपावली के दिन यानी 12 ननवंबर को चौघड़िया मुहूर्त : दोपहर में 2 बजकर 44 मिनट से 2 बजकर 47 मिनट तक।
घर में लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त अमृत, चार चौघड़िया मुहूर्त : शाम में 5 बजकर 29 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक।
ऐसे करे पूजन
पूजन से पहले घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
मुख्य द्वार पर रंगोली भी बना सकते हैं । पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाकर वहां देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।चौकी के पास जल से भरा कलश रख दें। माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा पर तिलक लगाएं और उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाकर उन्हें जल, मौली,गुड़, हल्दी, चावल, फल, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें। इसके बाद देवी सरस्वती, मां काली, श्री हरि और कुबेर देव की विधि विधान पूजा करें। महालक्ष्मी पूजा के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरणों की पूजा करें। अंत में माता लक्ष्मी की आरती जरूर करें और उन्हें मिठाई का भोग लगाएं। और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद का वितरण करें ।
इन मंत्रों का करें उच्चारण
ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ऊं श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।