आज 05 अक्टूबर को देशभर में विजयादशमी और दशहरा का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया जाएगा । दशहरा असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। नवरात्रि के नवमी पूजन के अगले दिन विजयदशमी का जश्न मनाया जाता है । इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था साथ ही मां भगवती ने 9 रात और 10 दिन का युद्ध कर महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी । देशभर में दशहरा के मेले का आयोजन भव्य रूप से मनाया जाता है । इस दिन बच्चे, बड़े, बुजुर्ग, महिलाएं सभी नए कपड़े पहनते हैं और इस त्योहार का उत्सव मनाते हैं ।
तिथि
दशमी तिथि 4 अक्टूबर दोपहर 2.20 बजे से शुरू हो गई है और 5 अक्टूबर दोपहर 12 बजे तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र 4 अक्टूबर को रात्रि 10.51 बजे से 5 अक्टूबर को रात्रि 9.15 बजे तक रहेगा। विजयादशमी पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः 7.44 बजे से प्रातः 9.13 बजे तक, इसके बाद प्रात: 10. 41 बजे से दोपहर 2.09 बजे तक रहेगा। इसमें भी विजय मुहूर्त दोपहर 2.07 बजे से दोपहर 2.54 बजे तक रहेगा।
अपराजिता और शमी पेड़ की पूजा का विशेष महत्व
दशहरा पर विजय मुहूर्त या अपराह्न काल में पूजा करना उत्तम माना गया है । इस दिन प्रात: काल स्नान के बाद नए या साफ वस्त्र पहने और श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी की पूजा करें । जहां पूजा करनी है वहां गंगाजल छिड़कें और चंदन से लेप लगाकर अष्टदल चक्र बनाएं । इस दिन अपराजिता और शमी पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। अष्टदल चक्र के बीच अपराजिताय नमःलिखें । अब मां जया को दाईं तरफ और मां विजया को बाईं तरफ स्थापित करें । ॐ क्रियाशक्त्यै नमः और उमायै नमः मंत्र बोलकर देवी का आह्वान करें । दशहरा के दिन शस्त्र पूजन का बहुत महत्व है । विजयादशमी पर क्षत्रिय, योद्धा और सैनिक सर्वत्र विजय की कामना के साथ अपने शस्त्रों की पूजा करते है ।