नवंबर का महीना है। जिसमें श्राद्ध अमावस्या भी आएगी। इसी संबंध में आज हम जानकारी देंगे। सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार, साल में कुल 12 अमावस्या और 12 पूर्णिमा आती हैं, यानी हर माह में एक अमावस्या और एक पूर्णिमा अवश्य पड़ती है। मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या भी कहा जाता है। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मार्गशीर्ष अमावस्या होती है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन स्नान और दान करते हैं। पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म आदि करते हैं। इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर को है।
जानें शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि 9 नवंबर 2025 की सुबह 9 बजे 43 मिनट से प्रारंभ होगी। वहीं, यह तिथि अगले दिन 20 नवंबर 2025 को दोपहर 12 बजे 16 मिनट पर समाप्त होगी। पंचांग के अनुसार उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए, इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी।
इस दिन सूर्योदय सुबह 06:48 बजे होगा। पितरों की पूजा का समय सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। भगवान विष्णु जी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:01 से सुबह 05:54 बजे तक है। राहुकाल का समय दोपहर 01:26 से दोपहर 02:46 बजे तक रहेगा, इस दौरान किसी शुभ कार्य से बचें।
भगवान श्रीहरि की करें पूजा
इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु जी का विशेष पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या पर विधिवत पूजा-पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसके अलावा, अमावस्या का दिन पितरों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन पितृ तर्पण करने, पवित्र नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं।