Health tips: डेंगू बुखार के लिए यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां, एक दिन में बढ़ जाता है प्लेटलेट्स, जानें

आज हम स्वास्थ्य से संबंधित फायदों के बारे में आपको बताएंगे। मौसम में बदलाव के साथ डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। उत्तराखंड में डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। आज इससे जुड़ी कुछ जानकारियां हम आपको देंगे। एक मीडिया रिपोर्ट्स में इसके आयुर्वेदिक उपाय बताए गए हैं। डेंगू एक वायरल बीमारी है जो मच्छरों के द्वारा फैलती है। एडिस एजिप्टी स्पीशीज इसका मुख्य कारक है। यह विश्व भर में एक चिंता का विषय है। खास कर ट्रॉपिकल और सब ट्रॉपिकल क्षेत्रों में। वैसे तो डेंगू का कोई इलाज नहीं है। लेकिन आयुर्वेद डेंगू का उपचार संभव है, कुछ औषधियों के माध्यम से आप डेंगू के लक्षणों को कम करके खुद को रिकवर कर सकते हैं। इस आर्टिकल में हम कुछ आयुर्वेदिक हर्ब्स के बारे में जानेंगे जो डेंगू में फीवर को मैनेज करने में सहायता करते हैं।

आइए जानें आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां

पपीते का पत्ता

आयुर्वेद में पपीते के पत्ते काफी प्रसिद्ध हैं। यह प्लेटलेट को बढ़ाने में और ब्लड क्लॉटिंग को इंप्रूव करने में सहायक होते हैं। डेंगू फीवर में आपकी प्लेटलेट काफी कम हो जाती हैं। इससे आपको काफी सारी समस्याएं आ सकती हैं। पपीते के पत्ते का जूस पीने से प्लेटलेट लेवल को बढ़ाया जा सकता है और इससे रिकवरी की प्रक्रिया में भी तेजी देखने को मिल सकती है। सबसे पहले आपको पपीते के पत्तों को क्रश करना है और उनका रस निकाल लेना है। इसे आप रोजाना दो बार पी सकते हैं।

गिलोय

गिलोय को गुडुची और अमृता के नाम से भी जाना जाता है। यह आयुर्वेदिक दवाइयों का एक अहम हिस्सा है और इसमें इम्यून सिस्टम को बढ़ाने वाले तत्व होते है। इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं और साथ ही एंटी पायरेटिक गुण भी होते हैं। यह आपका बुखार उतारने में और बाकी लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं। गिलोय जूस को पीने से या फिर कैप्सूल का सेवन करने से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत हो सकता है और रिकवरी तेज हो सकती है।

नीम

नीम को काफी लाभदायक हर्ब्स में से एक माना जाता है और इसके काफी स्ट्रॉन्ग एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह ब्लड को प्यूरिफाई करने में और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में सहायक होता है। नीम के पत्तों को उबाल कर चाय बनाई जा सकती है या फिर इसे कैप्सूल्स और एक्सट्रैक्ट के रूप में खाया जा सकता है। नियमित रूप से नीम का सेवन करना डेंगू में बुखार को कम कर सकता है और नेचुरल डिफेंस मैकेनिज्म को मजबूत कर सकता है।

तुलसी

तुलसी को काफी पवित्र माना जाता है। इसमें एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं और इम्यूनो-मॉड्यूलेटरी गुण भी होते हैं। यह बुखार कम करने में मदद करती है और रेस्पिरेटरी सेहत को सुधारती है। शरीर के इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करती है। तुलसी के पत्तों का सेवन करना या तुलसी की चाय पीना डेंगू के लक्षणों को कम कर सकता है और रिकवरी प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकता है। तुलसी अन्य इन्फेक्शन के रिस्क को कम करने में भी सहायक है जो डेंगू के दौरान हो सकते हैं।

हल्दी

हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह बुखार कम करने में, दर्द से छुटकारा दिलाने में और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करती है। गर्म दूध में हल्दी को मिक्स करके पीने से डेंगू फीवर से राहत मिल सकती है। हालांकि इसके डोज के बारे में किसी आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर से पूछें।

एलोवेरा

एलोवेरा एक प्रसिद्ध जड़ी बूटी है जिसको इसके सूदिंग और कूलिंग गुणों के लिए जाना जाता है। यह डेंगू के लक्षणों जैसे घुटनों में दर्द, मसल्स में दर्द और स्किन रैश आदि से छुटकारा दिलवा सकते हैं। एलोवेरा जूस हाइड्रेशन को बूस्ट करने के लिए और शरीर के हीलिंग प्रोसेस को मजबूत करने के लिए पिया जा सकता है। स्किन इरीटेशन को कम करने के लिए भी इस के जेल को स्किन पर अप्लाई किया जा सकता है।

अस्वीकरण: डेंगू होने पर तुरंत चिकित्सक के पास जाएं, साथ ही साफ सफाई का ध्यान रखें।