पूरे देश भर में 26 जनवरी को बड़ी धूमधाम के साथ गणतंत्र दिवस मनाया गया। जिस पर भारतीय अमेरिकन कवयित्री निधी ठाकुर ने अपनी कविता शेयर की है, जिसका शीर्षक है ‘भारत हम में बसता है’।
भारत हम सब में बसता है-
क्या है भारत?
इंडिया किसका है?
कौन हिंदुस्तान है?
इन सभी सवालों का जवाब न गूगल पर है न गीता-बाइबल और कुरान में हैं। इन जवाबों को देखना होगा, सुनना होगा और पहचानना होगा।
“बहुत बड़े प्राचीन गहरे से उत्तर हैं ये इनके लिए खैरियत रखना होगा।
कश्मीरी कहवे की इलायची,केसर की खुशबू। कन्याकुमारी के सांभर में पड़े कड़ी पत्ते के तड़के का जादू। “
“महाराष्ट्र की बनी बैटरी साड़ी लाल कमल पर बैंगनी मोर वाली।
कहने को सूखा सा और भूरा रेगिस्तान पर सब रगों से रंगीला लहरिया राजस्थान।
पूरी दुनिया में पंजाब की सरसों सा कुछ भी नहीं पीला और जुलाई में मुंबई में कौन नहीं गीला।”
“गंगा जल की मिठास और कुंभ मेला खास,अमृतसर के प्रसाद का अनमोल स्वाद,असम और दार्जालिंग की चाय सुबह तड़के सबकों जगाए”।
“देहरादून के बासमती चावल जमाए असम से गुजरात के लंच टेबल,
कर्नाटक वाली कॉफी और शिमला की मॉल रोड बाली टॉफी,
सोचकर ही लार टपके और मुंह में आए पानी ऐसी है पुरानी दिल्ली की चाट और हैदराबाद की बिरियानी।”
और इस प्रकार यह है कि दुनिया में जहां भी प्रवासी भारतीय तिरंगे की जासूसी करते हैं, वे जानते हैं कि यह केवल एक रंग है, और वह रंग सोना है, क्योंकि यादें सुनहरी हैं।