राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर सभी जिलों की पर्यावरणीय योजना बनाई जाएगी इस संबंध में दिनांक 26 अगस्त शुक्रवार को पिथौरागढ़ के विकास भवन में डीएम आशीष चौहान एवं डीएफओ कोको रोस की अध्यक्षता में एक दिन की कार्यशाला संपन्न हुई इसमें जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे।
एनजीटी के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों की पर्यावरण की योजना बनाई जानी है
कार्यशाला में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ जे सी कुनियाल ने बताया कि एनजीटी के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों की पर्यावरण की योजना बनाई जानी है । जिसके तहत ठोस, प्लास्टिक , बायो मेडिकल एवं अन्य वेस्ट का प्रबंधन भविष्य में वैज्ञानिक तरीके से कैसे किया जाए इस इस पर प्रत्येक जिले की एक पर्यावरणीय योजना तैयार होनी है जोकि ड्राफ्ट के रूप में संपूर्ण हो चुकी है।
ठोस एवं बायोमेडिकल कचरा का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से कैसे किया जाए उससे संबंधित चर्चा हुई
जिलाधिकारी आशीष चौहान जी ने बताया कि जिले में ठोस एवं बायोमेडिकल कचरा का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से कैसे किया जाए उससे संबंधित चर्चा हुई । और भविष्य में जिले में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं एयर मॉनिटरिंग स्टेशन नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़ में लगाने से संबंधित भी चर्चा हुई ।
वैज्ञानिक डॉ जे सी कुनियाल जी ने बताया कि गीले कचरे का माइक्रोबियल कंपोस्टिंग के माध्यम से हम कैसे खाद बना सकते हैं उसके बारे में भी उन्होंने विस्तृत रूप से जानकारी दी। जल्द ही चर्चा किए गए बिंदुओं को पिथौरागढ़ की जिला पर्यावरण योजना में सम्मिलित करने के बाद जिले की पर्यावरण योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पिथौरागढ़ जिले की पर्यावरणीय योजना हर दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है
जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सुनील नौटियाल ने भी वर्चुअली यह संदेश दिया कि पिथौरागढ़ जिले की पर्यावरणीय योजना हर दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है । चाहे वह सीमा की दृष्टि से हो या सांस्कृतिक दृष्टि से हो नेपाल जो हमारा एक पड़ोसी मित्र राष्ट्र है ,उनकी एवं हमारी सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विशेषताएं लगभग समान है। मुझे आशा है कि यह पर्यावरण योजना हमारी एवं पड़ोसी देश नेपाल की सांस्कृतिक विरासत एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाने में एक सुदृढ़ भूमिका निभाएगी ।