चैत्र नवरात्रि: नवरात्र का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित, बन रहा रवि योग, जानें पूजा का शुभ मूहर्त

नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा  को समर्पित है। कूष्मांडा स्वरूप की पूजा-साधना करने पर साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए मां को सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन  देवी की पूजा-आराधना करने से  भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद की प्राप्ति होती है।

जानें शुभ मूहर्त

हिंदू पंचाग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 24 मार्च को दोपहर 03 बजकर 29 मिनट पर शुरू और 25 मार्च दोपहर 02 बजकर 53 मिनट पर  समापन होगा।बता दें कि नवरात्रि के  चौथे दिन अति शुभ योग अर्थात रवि योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन रवि योग सुबह 06 बजकर 15 मिनट से सुबह 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मां कुष्मांडा की उपासना करने से पूजा का विशेष फल मिलता है।

ऐसा है मां का स्वरूप

मां कुष्मांडा के स्वरूप को आठ भुजाओं वाला माना जाता है।  कुष्मांडा मां के हाथों में कमंडल, धनुष, कमल, पुष्प, अमृतकलश, गदा व चक्र आदि होते हैं। इसके साथ ही मां जपमाला रखती हैं और सिंह की सवारी करती हैं। मां कूष्मांडा देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। देवी कुष्मांडा को मान्यतानुसार रोग दूर करने वाली देवी भी कहते हैं और वे भक्तों को यश, बल व धन से समृद्ध कर देती हैं।

पूजन विधि

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा करने के लिए प्रातः स्नान आदि के बाद माता कूष्मांडा को नमन करें। मां कूष्मांडा को जल पुष्प अर्पित कर मां का ध्यान करें। पूजा के दौरान देवी को पूरे मन से फूल, धूप, गंध, भोग चढ़ाएं। इस दिन पूजा के बाद मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं। आखिर में अपने से बड़ों को प्रणाम कर प्रसाद वितरित करें और खुद भी प्रसाद ग्रहण करें।माना जाता है कि मां कुष्मांडा को हरा रंग अतिप्रिय होता है इसलिए माता रानी को प्रसन्न करने के मनोभाव से इस दिन हरा रंग पहना जाता है।

जानें कथा

जब सृष्टि का अस्तित्व भी नहीं था तब चारो तरफ सिर्फ अंधकार ही था, उस समय माँ कुष्मांडा ने अपने मंद हास्य से सृष्टि की रचना की थी। कुष्मांडा माँ के पास इतनी शक्ति है की वो सूरज के घेरे में भी रह सकती है, क्योकि उनके पास ऐसी शक्ति है जो असह्य गरमी को भी सहन करती है। इसलिए माँ कुष्मांडा की पूजा से जीवन में सभी प्रकार की शक्ति और ऊर्जा प्राप्त होती है।

इन मंत्रों का करें उच्चारण

🙏ओम देवी कूष्माण्डायै नमः सूरसम्पपूर्णा कलशम् रुधिराप्लुतनेव च
दधाना हस्तपद्माभ्याम् कूष्मांडा शुभदास्तु मे🙏

🙏या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः🙏