अल्मोड़ा: भारी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति का अंदेशा, जांच में जुटी टीम

अल्मोड़ा में तीन सालों के भीतर काटे गए पेड़ों को लेकर अधिकारी भी आश्चर्यचकित हैं। जारी आंकड़ों को देखते हुए टीम ने अपनी जांच पड़ताल शुरू कर दी है ।

जांच के लिए कमेटी का गठन

अल्मोड़ा वन प्रभाग के अधीन मोहान, रानीखेत, जौरासी, द्वाराहाट, सोमेश्वर और अल्मोड़ा फॉरेस्ट की रेंज आती हैं। एक व्यक्ति ने गोपनीय शिकायत करते हुए वन मंत्री और पीसीसीएफ को बताया कि इन क्षेत्रों की वन पंचायतों और नाप भूमि पर तीन साल के भीतर मानकों को ताक पर रखकर पेड़ कटान की अनुमति दे दी गई।इस शिकायत की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। वहीं कुछ रिपोर्ट में ये सामने आ रहा है कि अधिकांश लोगों को एक या दो ही पेड़ काटने की अनुमति दी गई है। अल्मोड़ा वन प्रभाग के तहत नाप भूमि और वन पंचायतों में तीन साल के भीतर बेतहाशा पेड़ कटान की अनुमति दी गई और यहां पेड़ों को काटा गया है। कहा जा रहा है कि एक- एक व्यक्ति को 150 से पौने तीन सौ तक पेड़ काटने की अनुमति वन विभाग के अधिकारियों ने दी है। फिलहाल टीम द्वारा इसकी जांच की जा रही है ।

दो साल के भीतर अल्मोड़ा वन प्रभाग की वन पंचायतों में 13010 पेड़ काटने की अनुमति

एक रिपोर्ट के अनुसार विभागीय रिकॉर्ड में ये सामने आया है कि दो साल के भीतर अल्मोड़ा वन प्रभाग की वन पंचायतों में 13010 पेड़ काटने की अनुमति मिली है ।  ऐसे में वन पंचायतों की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में जांच को लेकर हाई लेबल से सीधे मॉनिटरिंग की जा रही है। यदि जांच में कुछ गड़बड़ी सामने आती है तो इसमें अफसर और कई वन सरपंच नप सकते हैं। पेड़ों की खूंट गिनने और संबंधित वन पंचायतों का क्षेत्रफल इस जांच में अहम माना जा रहा है। यदि गलती मिली तो तत्काल कार्रवाई हो सकती है। उधर कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो ने बताया कि यदि वन पंचायतें भी जांच में दोषी पाई जाती हैं । तो संबंधित सरपंच के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा ।