हिंदू धर्म में पूर्णिमा का खास महत्व है। वर्ष 2023 की पहली यानि पौष मास की पूर्णिमा आज मनाई जा रही है । मान्यता के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर विधिवत पूजन से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है । पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बतलाया गया है । पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है । पौष का महीना सूर्य देव का माह है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है । अतः सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को ही होता है । इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती है ।
जानें पूजन विधि
सुबह स्नान से पहले व्रत करने का संकल्प लिया जाता है । पवित्र नदी में नहाने के बाद भगवान को अर्घ्य दें । सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना भी करें।भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को भी शामिल करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है । भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। इस पावन दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अधिक से अधिक ध्यान करें।पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा की पूजा अवश्य करें। चंद्रमा को अर्घ्य देने से दोषों से मुक्ति मिलती है। इस दिन आप ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं । इस दिन कंबल, गुड़, तिल जैसी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है ।
पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा तिथि 06 जनवरी 2023 को प्रात:काल 02:14 बजे से प्रारंभ होकर 07 जनवरी 2022 को प्रात:काल 04:37 बजे तक रहेगी ।