राॅक पेंटिंग्स को लेकर जताई चिंता
बहुत महिनों बाद मुझे जंगल घुमक्कड़ी करने का मौका मिला। कई माह बाद मुझे अवकाश पर घुमक्कड़ी करने को नसीब हुई। मैंने पैदल घुमक्कड़ी करने का मन बनाया और निकल गया अपने डेरे से कालीमठ की तरफ। यह समय रहा होगा साढे ग्यारह बजे का। कालीमठ अल्मोड़ा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहां पर चाय-छोले का ढाबा, वन विभाग की पुरानी चौकी स्थित है। जिस ढाबे में अल्मोड़ा से सिर्फ छोले खाने जाता था, आज उस ढाबे की जगह मकान बन गया है। अब उस ढाबे से भी जैसा मेरा संपर्क टूट जाएगा, जिसके छोले खाने के लिए मैं अल्मोड़ा से कालीमठ जाता था। इस ढाबे के आसपास कालीमठ का जंगल है। इस जंगल में दिन में ही तेंदुआ, काकड़, वन मुर्गी के अलावा नाना प्रकार के जीवों के दर्शन होते हैं। कई बार मैंने घुमक्कड़ी में इन्हें सामने से देखा है। इस जंगल के चप्पे-चप्पे को मैंने अपनी 20 घुमक्कड़ी में पूरा किया है। आज घुमक्कड़ी के लिए कालीमठ का जंगल, जो घणेली को जाने वाले जंगल से मिला है, वहां की पैदल घुमक्कड़ी का मन बनाया। घणेली के पास ही मैंने कई कप मार्क्स का चिंहीकरण अपनी पूर्व की घुमक्कड़ी में पूर्ण किया है। आज भी चार कप कप मार्क्स का चिंहीकरण किया। घणेली के जंगल की तरफ को चढ़ाई चढ़ते ही अल्मोड़ा, स्याही देवी का शिखर देखने को मिलते हैं। ऊपर की ओर चढते समय कफ़ड़खान की दिशा में बाज का घना जंगल है। इस जंगल में मैंने पूर्व की घुमक्कड़ी में तेंदुए के दर्शन किए हैं, वहां दिन में ही अंधेरा महसूस हो रहा था। बरसात के दिनों में हरी घास पैदा होती है और जंगल में सन्नाटा छाए रहता है। मैं बाज के घने जंगल में कुछ क्षण बैठकर इनको निहारते रहा। वहां से फिर अल्मोड़ा की दिशा की तरफ बढ़ा। एक ऐसे स्थान पर आया जहां से स्याही देवी इन जंगलों के इतिहास की मूक दर्शक बनकर निहार रही है। घणेली के जंगल से हम कसारदेवी के ठीक शिखर पर पहुंचते हैं। यह काफी ऊँची चढ़ाई है। इन जंगल में बहुत बड़े शिलाखंड है। शारदा मठ के ठीक नीचे मैं पहुंचा ही हूंगा। मैंनेअपना पिट्ठू निकाला और उसे अपना सिरहाना लगाकर लधार मारकर कुछ क्षण आराम किया। लधार मारकर कसारदेवी के उन पाषाणखंडों को निहार रहा था, जहां प्रागैतिहासिक काल के चित्र आज भी हैं, किंतु वो धूप, पानी के प्रभाव से काफी धूमिल गए हैं। पुरातत्व विभाग को इनकी सुध लेनी होगी, अन्यथा कसारदेवी में स्थित ये राॅक पेंटिंग्स मिट जाएंगी और हम उन चित्रों को सदा-सदा के लिए खो देंगे। इस राॅक पेंटिंग्स के पाषाण खंड का संरक्षण किया जाना चाहिए। उत्तरखंड सरकार के आला-अफसरों को इसकी सुध लेने चाहिए। बहरहाल इन उड्यारों के पास ही स्पोर्ट्स ड्रेस पहने एक युवा को आस-पास भागते हुए देखा। वह युवा जंगल में इस तरह भाग रहा था,जैसे वह मैराथन की पै्रक्टिस कर रहा हो, या किसी नए अभियान की तैयारी कर रहा हो। वह युवा करीब 15 मिनट बाद मेरे पास भागकर आया, जहां पर मैं लधार मारकर राॅक पेंटिंग्स को निहार रहा था। उस युवा से मैंने परिचय प्राप्त किया। उसने अपना नाम रवि मेहता बताया। रवि मेहता खटीमा में मेहता फिटनेस क्लब चलता है। इस क्लब में हजारों युवा शामिल हैं। यू-ट्यूब, फेसबुक एवं इंस्टाग्राम में उनकी फें्रड फाॅलोइंग को आप देखकर कह सकते हैं कि वह कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे निभा सकता है। हजारों युवा उसके मुरीद हैं। युवा जोश से लबरेज यह युवा अपार शक्ति से भरा हुआ। हरेक युवा में इतना जोश यदि हो तो यह देश शीघ्र तरक्की करेगा। रवि ने बताया कि वह साईकिल चलाकर पहाड़ों को देखने का शौक रखता है। उसने लदाख, लेह तक की राइडिंग की है। मुझे भी अपने साथ लेह-लदाख तक साइक्लिंग करने का अनुरोध किया। पूरे उत्तरखंड में वह साईक्लिंग करके युवाओं को नशे से दूर रहने की सीख देंगे। लगभग 1 घंटे में मैंने उनसे कई बातें जानी। उसके बाद उन्होंने अपने साथी रोहित लोहिया से मिलाया। जो उनके साथ था। वो दोनों ही साथ काम कर रहे हैं। रवि की तरह रोहित भी 24वर्षीय युवा है। गंभीर और जिम्म्मेदार युवा। वह स्पोटर््स टीचर है। भविष्य में एक अच्छा खिलाड़ी बनना चाहता है। उसने बताया कि भागते हुए उसके पैर में चोट आ गई। जिससे पांव की हड्डी के पास टूट-फूट हुई है। उसने बताया कि अभी लचक-लचक कर चल रहा हूं और इसको ठीक करने के बाद मैं फिर से मैराथन में भाग लूंगा। ठीक करने में डेढ लाख तक का खर्च अभी आ रहा है। फिर भी उनके ईरादों को देखकर और उनके साथ बात कर मुझे शुकून मिला। दोनों ही युवाओं ने नवयुवकों को नशा न करने की अपील की। कसारदेवी के शारदा मठ से रोहित एवं रवि ने अपने दुपहिया से अल्मोड़ा जाने का अनुरोध किया। रवि ने रोहित से कहा-सर को अल्मोड़ा छोड के आ जाओ, मैं रास्ते में मिलूंगा। रोहित ने मुझे अपनी बाइक में बैठाया और अल्मोड़ा की तरफ बढ़ा। साथ में रनिंग करता हुआ रवि भी साथ-साथ बढ़ रहा था। कसारदेवी से पपरशैली, एन0टी0डी0 और फिर जेल सड़क तक वह भागता हुआ आया। उसको देखकर हर्ष हुआ कि वह उत्तराखंड के धावकों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा। सरकार को ऐसे युवाओं को सहयोग देने की सोचनी चाहिए। नौजवान को देखकर अपार हर्ष हुआ। रवि का लक्ष्य है कि मुक्तेश्वर में होने वाली मैराथन में वह कुछ-न-कुछ मेडल लेकर लौटेगा और भविष्य में अपने क्लब के युवाओं को देश की सेना के लिए फौजी तैयार करेगा। रोहित का लक्ष्य है कि योग सीखकर योग का टीचर बनेगा। दोनों ही युवाओं ने मेरा नंबर लेकर सहयोग लेने की बात कही। आज का दिन शानदार रहा।
डाॅ0 ललित योगी