दिसंबर का महीना है। जिसमें पौष पुत्रदा एकादशी है। आज हम इसी संबंध में जानकारी देंगे। हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन सृष्टि के पालनहार विष्णु जी की पूजा की जाती है। एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाने वाला पौष पुत्रदा एकादशी व्रत बहुत ही फलदायी होता है। इस व्रत से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि, पुत्रदा एकादशी पर विष्णु जी को केसर की खीर का भोग लगाने से संतान की रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यहीं नहीं जातकों का भाग्योदय भी होता है। इस वर्ष 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी।
जानें पुत्रदा एकादशी की कथा
पहले किसी समय में भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चम्पा था। उनके यहां कोई संतान नहीं थी, इसलिए दोनों पति-पत्नी सदा चिन्ता और शोक में रहते थे। इसी शोक में एक दिन राजा सुकेतुमान वन में चले गये। जब राजा को प्यास लगी तो वे एक सरोवर के निकट पहुंचे। वहां बहुत से मुनि वेदपाठ कर रहे थे। राजा ने उन सभी मुनियों को वंदना की। प्रसन्न होकर मुनियों ने राजा से वरदान मांगने को कहा। मुनि बोले कि पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकदाशी कहते हैं। उस दिन व्रत रखने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। तुम भी वही व्रत करो। ऋषियों के कहने पर राजा ने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया। कुछ ही दिनों बाद रानी चम्पा ने गर्भधारण किया। उचित समय आने पर रानी ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया, जिसने अपने गुणों से पिता को संतुष्ट किया तथा न्यायपूर्वक शासन किया।
जानें शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल एकादशी तिथि 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे होगा। इसलिए 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन भरणी नक्षत्र और सिद्ध का विशेष संयोग बना रहेगा।
पूजा के लिए
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 5:24 से 06:19
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 5:51 से 07:13
अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:3 से 12:44
विजय मुहूर्त- दोपहर में 2:07 से 02:49
निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:51