आज हम यहां लेख में तुला संक्रांति की जानकारी देंगे। तुला संक्रांति का पर्व बेहद विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है। जब भगवान सूर्य का प्रवेश शुक्र ग्रह के स्वामित्व वाली राशि तुला में होता है, तब तुला संक्रांति मनाई जाती है। वर्ष में कुल 12 संक्रांति में होती हैं और इनमें तुला संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करते हैं।
सूर्य देव की पूजा और गंगा स्नान का विशेष विधान
इस दिन गंगा स्नान कर सूर्य देव की पूजा और साधना करने का विधान है। भगवान सूर्य 17 अक्टूबर को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। फिर 15 नवंबर तक भगवान सूर्य इसी राशि में गोचर करेंगे। सूर्य देव के तुला राशि में प्रवेश करने पर ही तुला संक्रांति का पर्व मानाया जाएगा। तुला राशि के बाद 16 नवंबर को सूर्य देव वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।
दान का खास महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुला संक्रांति का दिन दान और पुण्य कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य देव का तुला राशि में प्रवेश जीवन में संतुलन, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक है। तुला संक्रांति पर किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना फलदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।