15 मार्च: आज है पापमोचनी एकादशी, जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान, जानें शुभ मुहूर्त 

आज 15 मार्च 2026 है। आज पापमोचनी एकादशी है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने के साथ विष्णु जी की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिल सकती है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। ये एकादशी होली और चैत्र नवरात्रि के बीच आती है।

पापमोचनी एकादशी

हिन्दू धर्म में एकादशी का काफी महत्व होता है। इस माह में पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह में 2 एकादशी आती है और पूरे साल में 24 एकादशी आती है । सभी एकादशी का अपना अलग अलग शास्त्रीय महत्व माना जाता है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति प्रत्येक एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करता है, उसे संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत में विधि-विधान से भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाती है। साथ ही भगवान कृष्ण का अभिषेक और ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ भी करना चाहिए।

जानें इस व्रत का महत्व

पापमोचनी दो शब्दों से मिलकर बना है – पाप और ‘मोचनी’। इसका अर्थ है पाप समाप्त करने वाला। इसलिए इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत को रखने से सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

जानें शुभ मुहूर्त

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि- 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर आरंभ होगी। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त- 15 मार्च को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 16 मार्च को सुबह 6 बजकर 30 मिनट से सुबह 8 बजकर 54 मिनट तक है। 15 मार्च को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च 2026, रविवार को ही रखा जाएगा।

जानें पूजन विधि

पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत और पूजन करता है उसे मृत्य के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही वैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है। पापमोचनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। घर के मंदिर की साफ सफाई कर दीप प्रज्वलित करें। चौकी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति की स्थापना कर जलाभिषेक करें। दूध और केसर युक्त मिष्ठान तैयार कर भगवान विष्णु को अर्पित करें। भगवान विष्णु की पुष्प धूप, दीप, नैवेद्य से पूजा करें। एकादशी तिथि की शाम को तुलसी के पौधे के समक्ष दीप जलाएं।