मिडिल ईस्ट संकट: समुद्री सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना हुई अलर्ट, ओमान की खाड़ी में बढ़ाई युद्धपोतों की तैनाती

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरों के बीच भारत ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाकों में अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ा दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नौसेना की बढ़ी हुई सक्रियता का ही परिणाम है कि भारतीय झंडे वाले टैंकर और जहाज सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों पर पहुँच रहे हैं। हाल ही में INS शिवालिक, आईएनएस सुनयना और व्यापारिक जहाज ‘जग लाडकी’ को सुरक्षा घेरे में सुरक्षित लाया गया है।

​जानें क्यों अहम है यह तैनाती

• ​रणनीतिक बढ़त: 2019 से जारी ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत इस क्षेत्र में सामान्यतः 1 से 3 युद्धपोत तैनात रहते थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब इनकी संख्या बढ़ा दी गई है।
• ​सघन निगरानी: वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर भारतीय नौसेना के वॉरशिप पैनी नजर रखे हुए हैं।
• ​गोपनीयता: सुरक्षा कारणों से तैनात किए गए युद्धपोतों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया गया है।

नौसेना के दो बड़े ऑपरेशन

​भारतीय नौसेना इस समय अरब सागर और खाड़ी देशों के पास दो मोर्चों पर सक्रिय है:
• ​ऑपरेशन संकल्प: ओमान की खाड़ी में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए।
• ​एंटी-पायरेसी ऑपरेशन: अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती को रोकने के लिए।

क्या है मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट?

साल 2017 से शुरू की गई इस नीति के तहत भारतीय नौसेना 6 प्रमुख समुद्री क्षेत्रों में 24×7 तैनात रहती है। इसका उद्देश्य समुद्री डकैती रोकना, मित्र देशों के साथ युद्धाभ्यास करना और आपातकालीन स्थिति में तत्काल राहत पहुँचाना है।