नैनीताल जिले से जुड़ी खबर सामने आई है। जिले में सेब का उत्पादन करने वाले फल उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है। उत्तराखंड राज्य बनने के लगभग 22 साल बाद प्रदेश सरकार ने राज्य में सेब नीति बनाने की पहल शुरू की है। यदि ऐसा हुआ तो इससे न केवल सेब उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलेगा बल्कि जिले में उत्पादित सेब को नई पहचान भी मिल सकेगी।
जिले में सालाना 2070 मीट्रिक टन सेब का होता है उत्पादन
उद्यान विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो नैनीताल जिले में 541 हेक्टेयर भूमि में सेब का उत्पादन होता है। इसमें सबसे अधिक सेब का उत्पादन रामगढ़ और मुक्तेश्वर क्षेत्र में होता है जबकि धारी, बेतालघाट और भीमताल सेब उत्पादन में रामगढ़ और मुक्तेश्वर से पीछे हैं। पिछले वर्षों के दौरान नैनीताल जिले में सेब का रकबा और उत्पादन दोनों में ही इजाफा हुआ है। वर्तमान में जिले में सालाना 2070 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है। यहां पैदा होने वाला सेब हल्द्वानी समेत बरेली, मुरादाबाद और दिल्ली तक की मंडियों में पहुंचता है लेकिन सेब का आकार छोटा होने व पर्याप्त मिठास न होने के कारण बागवानों को उसकी पर्याप्त कीमत नहीं मिल पाती है।
परंपरागत प्रजातियों के साथ अब नई प्रजाति के बगीचे भी स्थापित
पिछले वर्षों के दौरान जिला प्रशासन और उद्यान विभाग के प्रयासों के बाद जिले के सेब उत्पादकों ने परंपरागत प्रजातियों के अलावा भी दूसरी अन्य प्रजातियों के सेब के बगीचे विकसित किए हैं। उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व के वर्षों में नैनीताल जिले में मुख्य रूप से डेलीसस, भूरा डेलीसस, गोल्डन डेलीसस, रायल डेलीसस, फैनी, बिनोली, अर्ली सनवरी, रेड गोल्ड और राइमर प्रजाति के सेब के ही बगीचे थे। हाल के वर्षों में अब जिले के रामगढ़ और धारी ब्लाॅक के काश्तकारों ने गेलगाला, रेडलमगाला, जीरो माइन, ग्रीन स्मिथ, डार्कपेरूम, गाला, सुपर स्कारलेट, किंग रोड जैसी प्रजातियों के सेब के बगीचे भी विकसित किए हैं।
सेब नीति बनाने से सेब उत्पादकों को मिलेगा लाभ
डाॅ. आरके सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी नैनीताल ने बताया कि विभाग की ओर से फल उत्पादकों को सेब की नई और तेजी से विकसित होने वाली प्रजातियों के पौध उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले वर्षों कौ दौरान जिले में सेब का रकबा और उत्पादन दोनों में इजाफा हुआ है। यदि सरकार सेब नीति बनाती है तो इसका सीधा लाभ सेब उत्पादकों को मिलेगा।