28 सितंबर: शहीद-ए-आजम भगत सिंह की आज है 116वीं जयंती, पीएम नरेन्द्र मोदी ने किया सलाम

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते‌ है। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। आज 28 सितंबर है। आज भगत सिंह की जयंती है। शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह को आज पूरा देश उनकी 116वीं जयंती पर याद कर रहा है।

पीएम नरेन्द्र मोदी ने किया याद

देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की आज 116वीं जयंती हैं। देश को अंग्रेजों को चंगुल से आजाद कराने के लिए भगत सिंह ने उस उम्र में मौत को गले लगा लिया, जिस उम्र में लोग अपने सुखद जीवन के सपने संजोते हैं।

पीएम नरेन्द्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनकी 116वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद-ए-आजम को श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने कहा ‘शहीद भगत सिंह को उनकी जयंती पर स्मरण कर रहा हूं। भारत की स्वतंत्रता के लिए उनका बलिदान और अटूट समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। साहस के प्रतीक, वह हमेशा न्याय और स्वतंत्रता के लिए भारत की अथक लड़ाई का प्रतीक रहेंगे।’

28 सितंबर 1907 को हुआ था जन्म

शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पाकिस्तान के पंजाब में स्थित लयालपुर के बांगा गांव के एक सिख परिवार में हुआ था। भगत सिंह को जब फांसी दी गई थी, तो उनकी उम्र महज 23 वर्ष थी। उनकी शहादत के बाद देशवासियों ने आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी भगत सिंह का जन्‍म 1907 में 28 सितंबर को हुआ था। 13 अप्रैल 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने एक पढ़ने लिखने वाले सिख लड़के की सोच को ही बदल दिया और उनका मन अहिंसावादी आंदोलन से उचट गया और उन्होंने ईट का जवाब पत्थर से देने की ठान ली और उन्‍होंने 1926 में देश की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्‍थापना की। 23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ लाहौर षडयंत्र के आरोप में अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर लटका दिया था।

शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार

✅✅कठोरता एवं आजाद सोच ये दो क्रांतिकारी होने के गुण है।
✅✅क्रांति में सदैव संघर्ष हो यह जरुरी नहीं| यह बम और पिस्तौल की राह नहीं है।
✅✅सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।
✅✅राख का हर एक कण, मेरी गर्मी से गतिमान है,मैं एक ऐसा पागल हूं, जो जेल में भी आजाद है।
✅✅जिंदगी तो अपने दम पर ही जी जाती है, दूसरों के कंधों पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।
✅✅कानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है,जब तक वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।
✅✅यदि बहरों को सुनना है तो आवाज तेज करनी होगी। जब हमने बम फेंका था तब हमारा इरादा किसी को जान से मारने नहीं था,हमने ब्रिटिश सरकार पर बम फेंका था। ✅✅ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ना होगा और उसे स्वतंत्र करना होगा।
✅✅व्यक्तियों को कुचल कर, वे विचारों को नही मार सकते।