आज 31 अक्टूबर 2025 है। आज भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है। इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि 31 अक्टूबर को मनाई जाती है। इस दिन, भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री की 1984 में उनके आवास पर उनके ही अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई थी। उन्हें देश की ‘आयरन लेडी’ के नाम से भी जाना जाता था।
राजनीतिक सफर
उनका जन्म 19 नवंबर वर्ष 1917 में इलाहाबाद में हुआ था। इंदिरा गांधी पढ़ाई पूरी करते ही राजनीति में सक्रिय हुईं, बेहद लोकप्रिय प्रधानमंत्री बनीं और अपने पूरे राजनीतिक सफर में एक लोकप्रिय नेता के तौर पर जानी गईं और आज भी उनके फैसलों को याद किया जाता है। इंदिरा गांधी ने अपने शासन काल में कई ऐसे फैसले लिये जो उस दौर में एक महिला के लिए काफी चुनौती भरे रहे और लोगों की कल्पना से परे भी। लौह महिला कहलाने वाली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का राजनीतिक सफर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। 1966 से 1977 के बीच लगातार तीन बार देश की बागडोर संभाली। भारत की प्रधानमंत्री-24 जनवरी, 1966 को प्रथम बार, 13 मार्च, 1967 को दूसरी बार और 18 मार्च, 1971 को तीसरी बार शपथ ग्रहण की। उसके बाद 1980 में दोबारा इस पद पर पहुंचीं और 31 अक्टूबर 1984 को पद पर रहते हुए ही उनकी हत्या कर दी गई। हालांकि जहां राजनीति उन्हें विरासत में मिली, तो कई ऐसे फैसले उनके कार्यकाल में लिये गये, जिसके वजह से उन्हें देशवासियों के गुस्से और विपक्ष की आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा। फिर भी इंदिरा गांधी कभी घबरायी नहीं। बल्कि देश सेवा के लिये हर पल आगे रहीं। इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में एक से बढ़कर एक कड़े और बड़े निर्णय लिये, जिसे देख कर विपक्षी नेता भी उनके साहस की सराहना करने लगे थे। यहां तक की चुनावी भाषणों में जिन सरलता से वो मंच बोलती जनता में एक नया जज्बा जगा देती। इंदिरा गांधी ने इंग्लैंड में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए दाखिला लिया, लेकिन अपना कोर्स पूरा नहीं कर सकीं और भारत लौट आईं। बाद में 1942 में फिरोज गांधी से शादी उनकी शादी हुई। उनके दो बेटे राजीव और संजय थे। इन्दिरा गांधी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एकमात्र संतान थीं।1966 में लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मृत्यु के बाद, उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया। पीएम के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। वह अपने पिता के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी सेवा करने वाली पीएम हैं। 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ भारत को जीत दिलाने के लिए इंदिरा गांधी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
भारत में लगाया आपातकाल
1971 में लोकसभा चुनाव के बाद, इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राज नारायण द्वारा उन पर कदाचार का आरोप लगाया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनावी कदाचार के आधार पर उस चुनाव को शून्य घोषित कर दिया, जिसका अर्थ था कि इंदिरा गांधी अब प्रधानमंत्री के रूप में अपना पद नहीं रख सकतीं थीं, लेकिन उन्होंने पद छोड़ने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में देश भर में अशांति फैल गई। उस दौरान गांधी ने अधिकांश विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करवा दिया। इस वजह से उनके खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए। विरोध बढ़ता ही जा रहा था कि उनके मंत्रिमंडल ने भारत के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को आपातकाल घोषित करने की सिफारिश की, जिसे राष्ट्रपति ने 1975 में लागू कर दिया। आपातकाल की घोषणा के बाद, पूरा देश इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी के प्रत्यक्ष शासन के अधीन था। पुलिस को विशेष अधिकार दिए गए थे, जो उन्हें अनिश्चित काल तक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने में सक्षम बनाता था। प्रेस को भी सेंसर कर दिया गया था। अधिकांश विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों को खारिज कर दिया गया था। अंत में, 1977 में, गांधी ने चुनाव दोबारा लड़ने का फैसला किया लेकिन वह चुनाव हार गईं। हालांकि 1980 में उन्होंने वापस चुनाव जीत लिया। 31 अक्टूबर, 1984 को उनकी सुरक्षा में तैनात दो सुरक्षाकर्मियों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उन्हें गोली मार दी। दिल्ली के एम्स ले जाते समय उनका निधन हो गया।