कवि डॉ. ललित योगी की भावों को उद्वेलित करने वाली रचना, समंदर को भला कोई, समझ पाया है क्या?
समंदर को भला कोई,समझ पाया है क्या?बादलों के रुख को कोईपहचान पाया है क्या?समंदर से भरे हैं हम,और दिल, समंदर सा है!समंदर के राज कोभला कोई पढ़ पाया क्या? समंदर… बहुत इंसान मिले हैं हर रोज,हर रोज इक नया चेहरा गढ़ा।हैं वे सभी चंचल-बहरूपिये,नहीं उनमें एक भी गहरा।।मौसम मिजाज हो…