रामनगर: क्षेत्र के निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण और मनमानी के खिलाफ ‘रामनगर टैक्स बार’ ने मोर्चा खोल दिया है।
कहीं यह बात
जिस पर संगठन ने इस संबंध में गहरा असंतोष जताते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगा, तो टैक्स बार का एक शिष्टमंडल सीधे शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत दर्ज कराएगा। रामनगर टैक्स बार के अध्यक्ष पूरन पांडे ने बताया कि क्षेत्र के कई निजी विद्यालय अभिभावकों से अवैध रूप से वार्षिक शुल्क वसूल रहे हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विद्यालय उन छात्रों से भी दोबारा वार्षिक शुल्क मांग रहे हैं जो पहले से ही वहां अध्ययनरत हैं, जो पूरी तरह से अनुचित और नियमों के विरुद्ध है।
महंगी सामग्री खरीदने का दबाव
संगठन के उपसचिव मनु अग्रवाल ने जानकारी दी कि विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर कॉपी-किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री केवल स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। वही सामग्री बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध है। कई मामलों में स्कूल इन वस्तुओं की बिक्री पर वैध बिल या रसीद भी नहीं दे रहे हैं, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही मांग की है कि पुराने छात्रों से दोबारा वार्षिक शुल्क वसूलने पर तुरंत रोक लगे। स्कूलों द्वारा सामग्री बेचने की अनिवार्यता खत्म हो और अभिभावकों को खुले बाजार से खरीदारी की स्वतंत्रता मिले। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अधिवक्ताओं ने जताई कड़ी नाराजगी
इस विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में वकीलों ने एक स्वर में विद्यालय प्रशासन की कार्यशैली की निंदा की। बैठक में मुख्य रूप से प्रबल बंसल, भूपाल रावत, फिरोज अंसारी, मनोज अग्रवाल, लईक अहमद, नावेद सैफी और गुलरेज़ रज़ा शामिल रहे। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह मनमानी न्यायोचित नहीं है और इससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।