हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली: उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध एवं विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में शुमार ‘श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 2026’ बुधवार देर शाम नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ (नंदानगर/घाट) में देव डोलियों के सकुशल विराजमान होने के साथ शांतिपूर्वक संपन्न हो गई है।
श्रद्धालुओं में उत्साह
जिसमें करीब 280 किलोमीटर लंबी यह कठिन एवं ऐतिहासिक यात्रा सरकारी उपेक्षा, असहयोग और विरोध की तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के बल पर अपने अंतिम मुकाम ‘होमकुंड’ तक पहुंची।
अड़चनों को पार कर पूरा किया इतने किमी का सफर
वर्ष 2025 से जनवरी 2026 तक उत्तराखंड सरकार और श्री नंदा देवी राजजात समिति (नौटी) द्वारा 2026 में हिमालई महाकुंभ ‘राजजात’ के आयोजन का प्रचार किया जा रहा था। हालांकि, जनवरी 2026 में समिति और सरकार यात्रा स्थगित कर इसे केवल वेदनी बुग्याल तक सीमित ‘लोकजात’ के रूप में आयोजित करने के पक्ष में आ गए। सरकार और समिति के इस एकतरफा फैसले से असंतुष्ट श्रद्धालुओं ने 1987 से पहले की परंपरा के अनुसार इसे ‘श्री नंदा देवी बड़ी जात’ के नाम से आयोजित करने का संकल्प लिया। आयोजन समिति के गंभीर प्रयासों के बीच कई तरह के भ्रम और अड़चनें पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन देवी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। 5 सितंबर को भारी बारिश के बीच नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से देव डोलियां, छतोलियां और चौसिंगा खांडू यात्रा के लिए रवाना हुए।
सुहाना हुआ मौसम
यात्रा की शुरुआत में जहाँ मौसम बेहद खराब था, वहीं बुग्याली और उच्च हिमालयी क्षेत्रों (वेदनी बुग्याल से आगे) में प्रवेश करते ही मौसम अचानक खुशगवार हो गया। श्रद्धालुओं ने इसे ‘नंदा देवी का चमत्कार’ माना। पिछले चार दशकों में यह पहला मौका था जब श्रद्धालुओं को इतना अनुकूल मौसम मिला, जिससे निर्जन और दुर्गम पड़ावों को पार करना आसान हो गया।
स्वयंसेवकों ने खुद बनाए पुल, 2014 से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी का दावा
श्री नंदा देवी बड़ी जात आयोजन समिति (पंजी पंजीकृत) के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत और मंदिर समिति कुरूड़ के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला ने बताया कि बिना किसी सरकारी वित्तीय या प्रशासनिक मदद के श्रद्धालुओं के सहयोग से यह यात्रा ऐतिहासिक रूप से सफल रही। शीला समुद्र से होमकुंड और आगे तातड़ा जैसे खतरनाक रास्तों पर समिति के स्वयंसेवकों ने ‘चंदनियाघट’ सहित तीन स्थानों पर लकड़ी के अस्थायी पुलों का निर्माण किया, जिससे यात्री सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचे। समिति ने दावा किया कि इस बार ‘बड़ी जात’ में 2014 में आयोजित ‘राजजात यात्रा’ से भी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर नया इतिहास रचा है।
उठे यह सवाल
वहींयात्रा के बिना किसी हादसे के सफलतापूर्वक संपन्न होने और हजारों भक्तों के सुरक्षित लौटने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा कोई आधिकारिक बयान जारी न किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश की सबसे बड़ी धार्मिक पैदल यात्रा की व्यवस्थाओं और उपेक्षा पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, थराली के वर्तमान भाजपा विधायक भूपाल राम टम्टा ने दूरभाष पर आयोजन समिति को सफल आयोजन की बधाई दी, वहीं पूर्व विधायक डॉ. जीत राम ने स्वयं कुरूड़ मंदिर पहुंचकर देव डोलियों के दर्शन किए और समिति का अभिनंदन किया।