देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने भारतीय विश्वविद्यालयों में निष्पक्षता, समानता और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से UGC अधिनियम 2026 लागू किया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन नए नियमों का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को शिक्षा परिसरों में किसी भी प्रकार के भेदभाव से मुक्त माहौल देना है, ताकि सभी स्वयं को सम्मानित और समान महसूस कर सकें। यह फैसला अब जाति, राजनीति और अधिकारों की बहस में बदल चुका है। इसी बीच जरूरी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 तो यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। तब तक UGC का 2012 वाला पुराना नियम लागू रहेगा।
होगा यह बदलाव
धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या दिव्यांगता के आधार पर विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजनों या इनमें से किसी भी सदस्यों के विरुद्ध भेदभाव का उन्मूलन करना तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों को समता एवं समावेशन को संवर्धन देना है। इस सिस्टम में Equal Opportunity Centre (EOC), Equity Committee (समता समिति) और Equity Squad शामिल हैं, जो शिकायत मिलने पर तय समय में कार्रवाई करेंगे। इसी बदलाव को लेकर विवाद हुआ है। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों पर झूठे आरोप लगने का खतरा बढ़ सकता है।
UGC क्या है
यूजीसी की स्थापना 28 दिसंबर 1953 को हुई थी। इसका फुल फॉर्म विश्वविद्यालय अनुदान आयोग है। इसे अंग्रेजी में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के रूप में जाता है। UGC देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और नियमन से जुड़ी शीर्ष संस्था है।