आज 13 मई 2026 है। आज परशुराम द्वादशी है। परशुराम द्वादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं और उनका जन्म त्रेता युग में हुआ था। यह भगवान शिव के परम भक्त माने जाते है। भले ही उनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था लेकिन उनके गुणों से क्षत्रियों की भांति थे।
जानें शुभ मुहूर्त
इस वर्ष 2026 में परशुराम द्वादशी (परशुराम व्रत) 13 मई को मनाई जाएगी। जो भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी को समर्पित एक महत्वपूर्ण उपवास है, जो संतान प्राप्ति के लिए विशेष रूप से किया जाता है। द्वादशी तिथि 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे शुरू होकर 14 मई 2026 को सुबह 11:20 बजे समाप्त होगी।
विष्णु के अवतार माने जाते हैं परशुराम
कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पांच पुत्रों में से चौथे पुत्र परशुराम थे।
शिवजी ने प्रसन्न होकर दिये थे अस्त्र
पौराणिक कथाओं के अनुसार धरती पर हो रहे अन्याय, अधर्म और पाप कर्मों का विनाश करने के लिए परशुराम जी का जन्म हुआ था। वे शिवजी के परम भक्त थे। उनकी साधना से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए थे। परशु भी उनमें से एक हथियार था। जिस कारण उन्हें परशुराम कहा जाने लगा । पौराणिक कथाओं में वे अपने प्रताप, ज्ञान, भक्ति के अलावा अपने क्रोध के लिए भी जाने जाते हैं।