UGC की खास पहल: अब कॉलेजों में सिर्फ डिग्री नहीं, छात्रों की ‘खुशी’ और ‘मेंटल हेल्थ’ पर भी रहेगा फोकस

​देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए एक क्रांतिकारी गाइडलाइन जारी की है।

बताया खास उद्देश्य

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि उनकी मानसिक सेहत (Mental Health), फिजिकल फिटनेस और ओवरऑल वेलबीइंग को प्राथमिकता दी जाएगी। UGC का मानना है कि शिक्षा का मकसद केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

तनाव और डिप्रेशन से निपटने के लिए बनेगा ‘सपोर्ट सिस्टम’

​आज के दौर में छात्र पढ़ाई के बोझ, करियर की अनिश्चितता और सोशल प्रेशर के कारण तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। UGC ने संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे इन समस्याओं को गंभीरता से लें। इसके लिए कैंपस में स्टूडेंट सर्विस सेंटर (SSC) बनाना अनिवार्य होगा। इन सेंटर्स पर प्रोफेशनल एक्सपर्ट्स मौजूद रहेंगे जो छात्रों की समस्याओं को सुनेंगे और उन्हें सही दिशा दिखाएंगे। संस्थानों को एक ऐसा सकारात्मक माहौल बनाना होगा जहां छात्र बिना किसी डर या दबाव के अपनी बात साझा कर सकें।

कैंपस लाइफ: क्लासरूम से बाहर भी होगा विकास

​UGC ने जोर दिया है कि छात्रों का विकास केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कैंपस में ऐसी गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी जो उनके सामाजिक और व्यक्तिगत विकास में मदद करें। जिसमें इंटर्नशिप, ग्रुप एक्टिविटी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।‌ कॉलेजों को खेल के मैदान, जिम और योग जैसी सुविधाएं देनी होंगी ताकि छात्र शारीरिक रूप से भी फिट रहें।

सख्ती नहीं, समझदारी से होगा समाधान

​नई गाइडलाइंस में एक महत्वपूर्ण बदलाव अनुशासन को लेकर है। UGC ने साफ कहा है कि छात्रों की व्यवहार संबंधी समस्याओं पर सजा देने के बजाय ‘काउंसलिंग’ का रास्ता अपनाया जाए। सख्ती की जगह सहयोग और सुधार (Reform) पर ध्यान देने से छात्र खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कॉलेजों को स्थानीय मेडिकल संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया गया है। इससे जरूरत पड़ने पर छात्रों को तुरंत विशेषज्ञ इलाज मिल सकेगा। साथ ही, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स तैयार करने पर भी जोर दिया गया है।