उत्तराखंड: चरस तस्करी मामले में अदालत का फैसला, मां-बेटे को सात-सात साल के कारावास की सुनाई सजा, महिला को भेजा अल्मोड़ा जेल

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के चंपावत में विशेष सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने चरस तस्करी के मामले में फैसला सुनाया। जिसमे अदालत ने मां-बेटे को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है।

जानें क्या है मामला

जानकारी के अनुसार कोतवाली पुलिस ने नवंबर 2019 में ललुवापानी-बनलेख के बीच गश्त के दौरान शाॅल ओढ़े महिला और पिट्ठू बैग लटकाए युवक को संदिग्ध हालात में पैदल गुजरते देख पूछताछ के लिए रोका। जब दोनों की तलाशी ली गई तो महिला के कब्जे से 830 ग्राम और युवक से 750 ग्राम चरस बरामद हुई। दोनों की पहचान रेशमा (45) और जावेद (23) निवासीगण ग्राम शाहपुरडंडी इस्लामनगर, बहेड़ी (यूपी) के रूप में हुई।
पूछताछ में दोनों के मां-बेटे होने का पता चला। पुलिस ने संबंधित धाराओं में दोनों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तब से यह मामला कोर्ट में चल रहा था।

अदालत का आदेश

जिसके बाद न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह और 29 दस्तावेज प्रस्तुत किए। पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुनाया। दोनों को सजा सुनाई गई। अर्थदंड न देने पर छह-छह माह अतिरिक्त सजा सुनाई है। वहीं  महिला को अल्मोड़ा जेल भेजा गया है। युवक किसी अन्य प्रकरण में बरेली कारागार में बंद है। उस प्रकरण में जेल से छूटने या जमानत मिलने पर उसे अल्मोड़ा जेल भेजा जाएगा। आदेश की प्रति बरेली और अल्मोड़ा कारागार जेल अधीक्षक को दी गई है।