उत्तराखंड विद्युत लोकपाल ने सुनाया फैसला: उपभोक्ताओं को दी राहत, खराब मीटर पर इतने से ज्यादा नहीं वसूला जा सकता अनुमानित बिल

उत्तराखंड: बिजली मीटर खराब होने के बाद यदि बिजली वितरण कंपनी (UPCL) समय पर उसे नहीं बदलती है, तो उपभोक्ता को अनिश्चितकाल तक अनुमानित (अपेक्षित) बिल भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

सुनाया फैसला

इस संबंध में उत्तराखंड विद्युत लोकपाल ने स्पष्ट किया है। जिसमें बताया है कि विभागीय लापरवाही का आर्थिक बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं डाला जा सकता। उत्तराखंड विद्युत विनियामक आयोग (UERC) के सप्लाई कोड के अनुसार यदि किसी परिसर का बिजली मीटर खराब हो जाता है, तो विभाग अधिकतम दो बिलिंग चक्र (Billing Cycles) तक ही औसत खपत के आधार पर अनुमानित बिल जारी कर सकता है। इस समयावधि के भीतर मीटर बदलना बिजली कंपनी (यूपीसीएल) की अनिवार्य जिम्मेदारी है। यदि निर्धारित समय में सही मीटर नहीं लगाया जाता, तो विभाग उससे आगे के बिलों की वसूली नियमानुसार नहीं कर सकता।
​जानें यह मामला

​यह मामला देहरादून निवासी हरविंदर सिंह सहगल से जुड़ा हुआ है। फरवरी 2025 में मीटर खराब हुआ। उपभोक्ता के परिसर में लगा बिजली मीटर फरवरी 2025 में खराब हो गया था। यूपीसीएल ने समय पर मीटर बदलने के बजाय फरवरी से अक्टूबर 2025 तक लगातार 6 बिलिंग चक्रों के लिए औसत/अनुमानित बिल जारी कर दिए।‌ परेशान होकर उपभोक्ता ने विद्युत लोकपाल के समक्ष गुहार लगाई कि विभाग द्वारा सप्लाई कोड के नियमों की अनदेखी की जा रही है। लोकपाल ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। जिस पर लोकपाल ने विभाग की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया। फैसले में कहा कि विभाग ने खराब मीटर को निर्धारित समयसीमा में न बदलकर लगातार छह बिलिंग चक्रों तक अनुमानित बिल जारी किए, जो सप्लाई कोड का स्पष्ट उल्लंघन है। खराब मीटर की स्थिति में कंपनी केवल दो बिलिंग चक्र तक ही औसत खपत का बिल ले सकती है। इसके बाद बिना नया और सही मीटर लगाए उपभोक्ता से बिजली शुल्क वसूलना गैर-कानूनी है।