उत्तराखंड: उत्तराखंड के जंगलों को भीषण आग से बचाने के लिए वन विभाग ने अब बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत विभाग ने राज्य की वर्षों से बंद पड़ी ‘फायर लाइनों’ को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
काम में जुटा विभाग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिसमें गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के छह वन प्रभागों में उगे लगभग 15,000 पेड़ों को काटने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद विभाग अब इन रास्तों को साफ करने के काम में जुट गया है।
134 लाट चिह्नित
रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ष 1986 में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए 1000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर पेड़ों के कटान पर रोक लगा दी थी। इस प्रतिबंध के कारण पुरानी फायर लाइनों का रखरखाव नहीं हो पा रहा था और वहां बड़ी संख्या में पेड़ व झाड़ियाँ उग आई थीं। इसके परिणामस्वरूप, आग लगने की स्थिति में ये लाइनें निष्प्रभावी साबित हो रही थीं। राज्य सरकार की पैरवी के बाद, वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने फायर लाइनों को साफ करने और वहां उगे पेड़ों के निस्तारण की अनुमति दी। कोर्ट ने शर्त रखी थी कि यह कार्य संबंधित वन प्रभाग की कार्ययोजना का हिस्सा होना चाहिए। वन विभाग ने इस पुनर्बहाली के लिए छह प्रभागों में कुल 134 लाट चिह्नित किए हैं। जिसमें कुमाऊं मंडल में 93 लाट (चंपावत, नैनीताल, रामनगर प्रभाग)। गढ़वाल मंडल में 41 लाट (देहरादून, कालसी और केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग)।