उत्तराखंड: उत्तराखंड सहित प्रदेश भर में स्वच्छता अभियान को नया धार देने के लिए 1 अप्रैल से नया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू होने जा रहा है।
यह नियम लागू
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब शहर या गांव में गंदगी मिलने पर केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। शहरी विकास विभाग ने इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और निकायों को कड़ाई से पालन करने हेतु निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
अब 2 नहीं, 4 रंगों के डस्टबिन होंगे अनिवार्य
नए नियमों के तहत अब कचरे को केवल गीले और सूखे में बांटना काफी नहीं होगा। अब जनता को कूड़े को चार श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग रंगों के डिब्बों में रखना होगा। अब नीले-हरे के साथ पीले और लाल रंग के डिब्बे भी जोड़े गए हैं। इसके तहत गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक और सैनिटरी कचरे को अलग-अलग रखना होगा। नियमों की अनदेखी अब महंगी पड़ेगी। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत उल्लंघनकर्ताओं पर भारी जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।वहीं केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी पैनी नजर रखेंगे। निरीक्षण के दौरान खामियां मिलने पर संबंधित एजेंसियां सीधे मुकदमे की संस्तुति कर सकती हैं। गलत जानकारी देने या समय पर कार्य योजना पेश न करने वाले अफसरों पर विभागीय जांच बैठाई जाएगी।
पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष सख्ती
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पहाड़ी राज्यों के लिए कचरा प्रबंधन के नियम और भी सख्त रखे गए हैं। शहरी क्षेत्रों में इसकी जिम्मेदारी नगर निकायों की होगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों को जवाबदेह बनाया गया है। स्वच्छता अपशिष्ट को लेकर विशेष निर्देश हैं कि इन्हें सीधे डस्टबिन में न डालकर डिस्पोजेबल पाउच या कागज में लपेटकर ही दिया जाए।