उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में एक नई पहल के साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की धरोहरों को संरक्षण देने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
संस्कृति विभाग राज्य सरकार की इस योजना को धरातल पर उतारेगा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी क्रम में राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि निजी पुरानी मूर्तियां, पांडुलिपियां, ताम्रपत्र, शिलालेख और कलाकृतियों को अब लाइसेंस दिया जाएगा। साथ ही उन लोगो को उनका मालिकाना हक भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि इन धरोहरों को लोग छुपा कर रखने के बजाय, उनको म्यूजियम में रखा जाए ताकि लोग उनको देख सके और समझ सके। इन सभी घरों में रखी गई कला कृतियों वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जाएगा और उसका डिजिटल डेटाबेस भी तैयार किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बात भी सामने आई है कि इसके लिए प्रदेश के हर जिले में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा और जानकारी जमा की जाएगी की किसके पास कौन कौन सी प्राचीन वस्तुएं हैं।इन वस्तुओं की पहचान, उनका विवरण, उनका समय निर्धारण और उनका ऐतिहासिक महत्व दर्ज कर डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा।