उत्तराखंड: अप्रैल माह में चारधाम यात्रा शुरू हो रहीं हैं। चारधाम यात्रा के दौरान उमड़ती भीड़ को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) सख्त हुआ है।
कहीं यह बात
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस पर प्रधान पीठ ने स्पष्ट किया कि सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहद नाजुक इस क्षेत्र की ‘कैरीइंग कैपेसिटी’ (वहन क्षमता) तय करने में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पूरी प्रक्रिया पर छह महीने का समय मांगा था। एनजीटी ने सरकार की इस मांग को असंगत बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील और सामरिक महत्व वाले इस क्षेत्र में इस तरह की लंबी समयसीमा उचित नहीं है।
अधिकरण के मुख्य निर्देश
जिस पर सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह चारधाम यात्रा की कैरीइंग कैपेसिटी संबंधी मसौदा रिपोर्ट एक हफ्ते के भीतर विधिवत आवेदन के साथ पेश करे। एनजीटी ने माना कि बार-बार होते भूस्खलन, नाजुक पर्वतीय ढांचे और सीमित संसाधनों के कारण यात्रियों और यातायात के दबाव का वैज्ञानिक आधार पर तय होना अनिवार्य है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय मंदिर समितियों, होटल संघों और परिवहन संगठनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। अधिकरण ने इस बात पर चिंता जताई कि चारधाम मार्ग (उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली) न केवल तीर्थाटन बल्कि सैन्य आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
एनजीटी ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले प्रगति रिपोर्ट दाखिल की जाए। साथ ही, परामर्श प्रक्रिया में आवेदनकर्ता पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।