उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र एंजेल चकमा की नस्लीय हमले में घायल होने के दो हफ्ते बाद मौत हो गई है। जिसके बाद इस घटना ने भारत के राज्यों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
जंतर-मंतर पर निकाला कैंडल मार्च
इसी क्रम में राजधानी दिल्ली में छात्रों का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने जंतर-मंतर पर कैंडल मार्च निकाला। हाथों में मोमबत्तियां लेकर उन्होंने नस्लवाद और घृणा अपराधों के खिलाफ एकजुटता दिखाई। छात्रों ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि नफरत किस हद तक बढ़ती जा रही है। उन्होंने पीड़ित छात्र अंजेल चकमा को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
हमले में मौत
यह घटना बीते 9 दिसंबर की शाम देहरादून के सेलाकुई इलाके के एक स्थानीय बाजार में हुई। जब एंजेल चकमा और उनका छोटा भाई माइकल चकमा बाजार गए थे, तभी बदमाशों के एक गुट ने उन पर नस्लीय टिप्पणियां शुरू कर दीं। हमलावरों ने उन्हें बार-बार ‘चीनी’ कहकर चिढ़ाया। दोनों भाई खुद को भारतीय बताते रहे, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया। इसी दौरान आरोपियों ने माइकल और अंजेल के साथ मारपीट शुरू कर दी। जिसमें आरोप है कि झगड़े के बीच अंजेल चकमा की गर्दन पर किसी नुकीली धारदार चीज से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। वहीं घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां 14 दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ते हुए अंजेल चकमा ने बीते शुक्रवार को दम तोड़ दिया।