उत्तराखंड: यहां दिखी दुर्लभ ‘उड़न गिलहरी’, जैव विविधता के लिए मजबूत‌ संकेत



उत्तराखंड: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध टूरिस्ट डेस्टिनेशन स्थल चंडाक में एक दुर्लभ प्रजाति की ‘उड़न गिलहरी’ (Flying Squirrel) दिखाई दी है।

जैव विविधता के लिए अच्छे संकेत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चंडाक क्षेत्र में घूमने आए नगर के एक स्थानीय युवा ने इस गिलहरी की गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद किया है। बताया कि नगर से लगे चंडाक क्षेत्र में साइकलिंग और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचे स्थानीय साइकिलिस्ट अनिल माहरा को एक पेड़ पर कुछ अजीब हलचल दिखाई दी। गौर से देखने पर वहां एक दुर्लभ उड़न गिलहरी नजर आई। जिसकी उन्होंने तस्वीर ले ली। जंगलों में इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी को विशेषज्ञ पर्यावरण और जैव विविधता के लिहाज से बेहद सकारात्मक मान रहे हैं।

​’ग्लाइडर’ की तरह उड़ती है यह गिलहरी

​वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, उड़न गिलहरी की शारीरिक बनावट और आदतें आम गिलहरियों से काफी अलग होती हैं।यह गिलहरी पक्षियों की तरह पंख फड़फड़ाकर नहीं उड़ती, बल्कि इसके पैरों के बीच त्वचा की एक लचीली झिल्ली होती है। जब यह छलांग लगाती है, तो उस झिल्ली को फैलाकर एक पैराशूट या ग्लाइडर की तरह हवा में तैरती है। यह अद्भुत जीव एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक अधिकतम 100 मीटर की दूरी तक आसानी से ग्लाइड कर सकता है। उड़न गिलहरी ‘निशाचर’ होती है और ज्यादातर रात के समय ही भोजन की तलाश में बाहर निकलती है। हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली यह प्रजाति आमतौर पर मिश्रित प्रजातियों के बेहद घने जंगलों में रहना पसंद करती है।