उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। मध्य हिमालयी राज्य उत्तराखंड की ठंडी और शुद्ध जलधाराओं में ट्राउट प्रजाति की मछली पाली जाती है। जो अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने के लिए तैयार हैं।
मत्स्य पालकों को बेहतर मिलेंगे दाम
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्तमान में पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी जिलों के साथ ही देहरादून के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित रेसवेज (मत्स्य तालाब में बहता हुआ साफ पानी) में मत्स्य पालक इनका उत्पादन कर रहे हैं। चंपावत, नैनीताल समेत अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी इसकी शुरुआत की जा रही है। वर्तमान में राज्य में 1625 रेसवेज में 710 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का उत्पादन हो रहा है। इसी क्रम में संयुक्त अरब अमीरात को ट्राउट के निर्यात के दृष्टिगत मत्स्यपालन विभाग खाद्य सुरक्षा समेत अन्य जरूरी प्रमाणपत्र प्राप्त करने की कवायद में लग गया है। प्रथम चरण में 20 टन ट्राउट मछली के निर्यात की योजना है। धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाई जाएगी।
कहीं यह बात
इस संबंध में सौरभ बहुगुणा, मत्स्यपालन मंत्री उत्तराखंड ने बताया कि राज्य में उत्पादित ट्राउट मछली के निर्यात के लिए फूड सेफ्टी समेत अन्य प्रमाणपत्र जरूरी हैं। प्रयास यह है कि जल्द से जल्द ये प्रमाणपत्र प्राप्त कर संयुक्त अरब अमीरात को ट्राउट की पहली खेप भेज दी जाए। इसके बाद अन्य देशों के लिए भी इसका निर्यात किया जाएगा।