उत्तराखंड: ऐतिहासिक बालेश्वर मंदिर की अद्भुत शिल्पकला के किए दर्शन, श्रद्धालुओं से की यह खास अपील, जानें इस ऐतिहासिक शिवधाम का इतिहास व महत्व

उत्तराखंड: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के पहले सोमवार के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को चंपावत के प्राचीन बालेश्वर मंदिर के बारे में खास जानकारी दी है।

की यह खास अपील

जिस पर उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से चंपावत आगमन पर इस प्रसिद्ध शिवधाम के दर्शन करने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में साझा किया। जिसमें कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जनपद में स्थित प्राचीन बालेश्वर मंदिर भगवान शिव की दिव्य आस्था, समृद्ध इतिहास और अद्भुत स्थापत्य कला का एक अनुपम संगम है। पत्थरों पर उकेरी गई इसकी बेजोड़ नक्काशी और प्राचीन शिल्पकला सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की गौरवगाथा बयां करती है। उन्होंने कहा कि अपने चंपावत प्रवास या यात्रा के दौरान इस पावन शिवधाम के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और हमारी समृद्ध विरासत का अविस्मरणीय अनुभव अवश्य लें।

​खास है महत्व

​उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और कलात्मक मंदिर है। इसका निर्माण चंद वंश के राजाओं द्वारा 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच कराया गया था। अपनी बेजोड़ पत्थर की नक्काशी और बेहतरीन वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध यह ऐतिहासिक स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में एक प्रमुख राष्ट्रीय धरोहर के रूप में दर्ज है।‌ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में बाली ने यहां असुरों से शांति के लिए भगवान शिव की पूजा की थी, जिसके बाद से इस पावन स्थल का नाम ‘बालेश्वर’ पड़ा। बालेश्वर मंदिर के अलावा इस भव्य परिसर में रत्नेश्वर मंदिर और चंपावती दुर्गा मंदिर भी स्थित हैं।