उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम, भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल, जानें यहां से जुड़ी पौराणिक व एतिहासिक तथ्य

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में स्थित विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बद्रीनाथ धाम के कपाट पिछले साल 25 नवंबर 2025 को बंद हुए हैं।

खास है मान्यता

बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में, अलकनंदा नदी के किनारे लगभग 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर का निर्माण 7वीं से 9वीं शताब्दी के मध्य में हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जिसे अलकनंदा नदी के तट पर बसाया गया है। मान्यता है कि यहाँ भगवान विष्णु की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी, जिसे आदि शंकराचार्य ने अलकनंदा नदी से निकालकर स्थापित किया था। यहाँ शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं और एक अखंड ज्योति जलती रहती है, जो वसंत ऋतु में फिर से खुलने पर अखंड रहती है। माना जाता है कि बद्रीनाथ धाम धरती का बैकुंठ लोक है, जहाँ साक्षात श्री हरि निवास करते हैं। 

भगवान विष्णु ने किया निवास

एक पौराणिक कथा के अनुसार, मूल रूप से यह भगवान शिव और पार्वती का निवास स्थान था, लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने यहाँ निवास किया। महाभारत के अनुसार, पांडव जब स्वर्ग की ओर जा रहे थे तो इस स्थान पर रुके थे। यह माना जाता है कि बद्रीनाथ की मूर्ति किसी कलाकार द्वारा नहीं बनाई गई थी, बल्कि यह अलकनंदा नदी में मिली एक स्वयं-प्रकट शिला थी, जिसे आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में स्थापित किया था। यह माना जाता है कि यहाँ के कुत्ते कभी नहीं भौंकते, क्योंकि वे भगवान के सेवक हैं और उन्हें शांति से रहने का आदेश दिया गया है। एक मान्यता के अनुसार, सर्दियों में जब मंदिर के कपाट बंद होते हैं तो देवतागण मंदिर की पूजा करते हैं। यहाँ भक्तों को वन तुलसीमाला, कच्चा चना और मिश्री जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं।