01 सितंबर: कुमाऊँ क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने का दिन कुमाऊंनी भाषा दिवस, जानें कैसे उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए है समर्पित

आज 01 सितंबर 2025 है। आज कुमाऊंनी भाषा दिवस मनाया जाता है। प्रदेश में आज एक सितंबर को कुमाऊंनी भाषा दिवस मनाया जा रहा है।

एक वार्षिक कार्यक्रम

कुमाऊँनी भाषा दिवस, या कुमाऊँनी भाषा दिवस, उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है। यह हर साल 1 सितंबर को उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने अलग राज्य के लिए संघर्ष किया था। इस दिवस का उद्देश्य कुमाऊँनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है।

इस भाषा का खास महत्व

उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र उत्तरी तथा दक्षिणी सीमांत क्षेत्र को छोड़ कर बाकि भू भाग में कुमाऊंनी भाषा बोली जाती है। कुमाऊँनी भारत के उत्तराखंड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में बोली जाने वाली एक इंडो-आर्यन भाषा है, जो उत्तराखंडी पहाड़ी भाषाओं की श्रेणी में आती है। यह भाषा अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और उधमसिंहनगर जिलों में बोली जाती है और इसकी कई क्षेत्रीय बोलियाँ भी हैं, जैसे मध्य कुमाऊँनी, पूर्वी कुमाऊँनी, और पश्चिमी कुमाऊँनी। 

कुमाऊंनी भाषा की उत्पत्ति

‘कुमाऊँनी’ शब्द की उत्पत्ति चंपावत क्षेत्र से हुई है, जिसे पहले ‘कुमू’ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ, कुमाऊँनी भाषा पर बाहरी भाषाओं, जैसे नेपाली और मध्यकाल में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रवासियों की भाषाओं का प्रभाव पड़ा है। इस भाषा की एक मजबूत साहित्यिक और मौखिक परंपरा है जो कुमाऊंनी लोगों के मूल्यों, विश्वासों और रीति-रिवाजों को प्रदर्शित करती है। यह भाषा छह मुख्य बोलियों में विभाजित है: मध्य कुमाऊँनी, दक्षिण-पूर्वी कुमाऊँनी, पश्चिमी कुमाऊँनी, अस्कोटी, सिराली और जोहारी।