08 फरवरी: आज है जया एकादशी, जानें पूजा विधि, श्रीहरि की बरसेगी कृपा, यह रहेगा शुभ मुहूर्त

आज 08 फरवरी 2025 है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सालभर में कुल 24 एकादशी पड़ती है। आज जया एकादशी व्रत है। इस व्रत का काफी महत्व होता है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है, जिसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जया एकादशी का व्रत आज 08 फरवरी 2025 दिन शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है।

जानें व्रत की महिमा

माघ महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘जया एकादशी’ कहते हैं। यह एकादशी बहुत ही पुण्यदायी है, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को नीच योनि से मुक्ति मिलती है। पदम् पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी तिथि का महत्त्व बताते हुए कहा है कि जया एकादशी प्राणी के इस जन्म एवं पूर्व जन्म के समस्त पापों का नाश करने वाली उत्तम तिथि है। साथ ही यह ब्रह्मह्त्या जैसे जघन्य पाप तथा पिशाचत्व का भी विनाश करने वाली है। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से प्राणी को कभी भी पिशाच या प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि जिसने ‘जया एकादशी ‘ का व्रत किया है उसने सब प्रकार के दान दे दिए और सम्पूर्ण यज्ञों का अनुष्ठान कर लिया । इस व्रत को  करने से व्रती को अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है। यह भी मान्यता है कि जो साधक इस व्रत को पूरे श्रद्धाभाव से करता है उसे भूत-प्रेत और पिशाच योनि की यातनाएं नहीं झेलनी पड़ती।

जानें शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के मुताबिक माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 07 फरवरी को रात 09 बजकर 27 मिनट पर हो रहा है, जो 08 फरवरी को रात 08 बजकर 14 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में जया एकादशी का व्रत 8 फरवरी को रखा जाएगा।
रवि योग- 7 फरवरी को सुबह 06:52 से 8 फरवरी 06:52 तक रहेगा।
जया एकादशी व्रत पारण का समय 09 फरवरी को सुबह 06 बजकर 51 मिनट से लेकर 09 बजकर 06 मिनट तक है।

पूजा विधि

जया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। घर के मंदिर की साफ सफाई कर दीप प्रज्वलित करें। चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना कर जलाभिषेक करें। दूध और केसर युक्त मिष्ठान तैयार कर भगवान विष्णु को अर्पित करें। भगवान विष्णु की पुष्प धूप, दीप, नैवेद्य से पूजा करें। एकादशी तिथि की शाम को तुलसी के पौधे के समक्ष दीप जलाएं।