आज 18 अगस्त 2025 है। आज देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारत माता के वीर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुण्यतिथि है। सुभाष चंद्र बोस एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें “नेताजी” के नाम से जाना जाता है। सुभाष चंद्र बोस जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था और उनकी मृत्यु आज ही के दिन 18 अगस्त 1945 को हो गई थी। सुभाष चन्द्र बोस को बंगाली में शुभाष चॉन्द्रो बोशु भी कहा जाता था।
विमान हादसे में मारे जाने पर रहस्य बरकरार
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में जानकी नाथ बोस और प्रभावती देवी के घर हुआ था। 18 अगस्त 1945 के दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विमान हादसे में मारे जाने की खबर को सुनकर हर हिंदुस्तानी को जबरदस्त झटका लगा था। 18 अगस्त 1945 को उनके अतिभारित जापानी विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। यह दुर्घटना जापान अधिकृत फोर्मोसा (वर्तमान ताइवान) में हुई थी। हालांकि इस हादसे की खबर जापान ने 5 दिन बाद सार्वजनिक की थी, लेकिन अभी तक नेताजी के विमान हादसे में मारे जाने पर रहस्य बरकरार है। महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की पुण्यतिथि के अवसर पर आज पूरा राष्ट्र उन्हें याद कर रहा है।
इसलिए अंग्रेजों की नौकरी नहीं कर पाए बोस
आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण करके सुभाष चंद्र बोस ने अपनी योग्यता का परिचय दिया। लेकिन राष्ट्र के प्रति अपने अटूट प्रेम के कारण वे अंग्रेजों की नौकरी नहीं कर सके और सुभाष चंद्र बोस ने सिविल सेवा से त्यागपत्र दे दिया।
नेताजी इन महान शख्सियतों को मानते थे अपना आदर्श
सुभाष चंद्र बोस विवेकानंद की शिक्षाओं से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे जबकि चितरंजन दास उनके राजनीतिक गुरु थे। वर्ष 1923 में बोस को अखिल भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष और साथ ही बंगाल राज्य कांग्रेस का सचिव चुना गया। 1925 में क्रांतिकारी आंदोलनों से संबंधित होने के कारण उन्हें माण्डले कारागार में भेज दिया गया।
भारतीयों ने प्यार से सुभाष चंद्र बोस को दिया ‘नेता जी’ का नाम
सुभाष चंद्र बोस की वीरता की गाथा भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सुनाई देती है। सुभाष चंद्र बोस की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि भारतीय उन्हें प्यार से ‘नेता जी’ कहते थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए।